अपने ही हाल पर बेजार आंसू बहाने को मजबूर शिक्षण संस्थान

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कमलेश चौधरी के साथ विमल गुप्ता

उत्राव। सरकारी शिक्षण संस्थानों का बुरा हाल शासन प्रशासन बेखबर मामला उन्नाव थाना सोहरामऊ क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम अर्जुना मऊ का है ए सरकारी स्कूल लगभग 1984 से ग्रामसभा अर्रना मऊ में चल रहा है लेकिन स्कूल की हालत इस प्रकार है की सरकारी अधिकारी एक बार भी उच्च प्राथमिक विद्यालय में कभी अपनी शक्ल नहीं दिखाने पहुंचे जिसका कारण है अर्जुना मऊ का पप्पू प्रधान की दबंगई आज तक जो भी प्रधान अर्रना मऊ का बना उस प्रधान ने कभी शिक्षा पर कभी ध्यान दिया ही नहीं क्योंकि प्रधान तो खुद ही अनपढ़ हैं तो शिक्षा जगत के बारे में उनको क्या मालूम इसलिए यहां के सरकारी स्कूल वा टीचर बरामदे में बैठने को मजबूर हैं।

1985 से आज तक स्कूल की बाउंड्री से लेकर और टॉयलेट आज तक किसी ने बनवाने की जहमत नहीं उठाई अगर शिक्षिकाएं ग्राम प्रधान से कहती भी हैं तो प्रधान अपनी मनमानी के चलते हमको समझा-बुझाकर शांत करा देते इतना ही नहीं बच्चों को जो मिड डे मील खाने के लिए आता है उसमें तक प्रधान के द्वारा कटौती की जाती है कहीं जाने के लिए एक पत्रकारों की टीम अर्जुना मऊ के उच्च प्राथमिक विद्यालय में जांच करने पहुंच गए तो टीचरों ने पत्रकारों को आपबीती सुनाई और मौके पर स्कूल का मुआयना किया गया तो स्कूल के दरवाजे तक भी टीचरों के अपनी सैलरी के माध्यम से लगवाए गए खिड़कियां तो नदारद ही हैं कोई भी बात अगर ग्राम प्रधान को कहा जाता है तो दबंग पप्पू प्रधान की दबंगई के कारण आज तक इस स्कूल में किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं कराया गया जबकि उत्तर प्रदेश सरकार एवं माननीय प्रधानमंत्री जी का शिक्षा और स्वास्थ्य के बारे में सरकार कितनी गंभीर होने के बावजूद भी सरकारी अधिकारी खुलेआम प्रधानों की मिलीभगत से सरकार का मखौल उड़ाने में लगे हुए अब देखने वाली बात है की इन प्रधानों की अधिकारियों के द्वारा कब तक मनमानी चलती है और इनके खिलाफ क्या कार्यवाही करते हैं।

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