पीलीभीत। एस एस हॉस्पिटल की लापरवाही के चलते एक किसान की मौत हो गई जिसके बाद परिजनों ने हंगामा काट दिया। परिजन का आरोप था कि डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की मौत हुई है। आपको बताते चले बरहा निवासी एक मजदूर को एस एस हॉस्पिटल में इलाज के लिए बृहस्पतिबार की सुबह भर्ती कराया गया था। मजदूर छत से गिर गया जिससे उसके सर में काफी चोट लग गई मजदूर को भर्ती कर डॉक्टरों ने परिजनों को मरीज को जल्द ही ठीक करने का आश्वासन दिया।अस्पताल में शाम तक परिजनों को कोई जबाब नहीं दिया और इलाज हो रहा है कह कर डॉक्टर चले गए देर रात जब परिजनों ने मरीज से मिलने को लेकर हंगामा काटा तो पता चला की मजदूर की मौत हो चुकी है। जिसके बाद मजदूर के शव को अस्पताल से बहार निकाल दिया गया जिसको लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा काटा और डॉक्टर पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। मिली जानकारी के मुताविक एस एस हॉस्पिटल में कोई भी न्यूरो सर्जन नहीं है जबकि मरीज के सर में चोट लगी थी जिसका इलाज न्यूरो सर्जन द्वारा किया जाना था।

आपको बता दे इससे पहले भी एस एस हॉस्पिटल में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी है। जिसको लेकर न तो पुलिस प्रसाशन और न ही स्वस्थ महकमे ने कोई कार्यवाही करने की जहमत उठाई है।विदित हो कि चौदह जुलाई 2017 को शहर कोतवाली पुलिस ने इंसानी खून के अबैध कारोबार में संलिप्त छह खून खींचने बाले एसएस हॉस्पिटल के कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार किये गए अभियुक्तों के ब्यान पर तैयार की गई फर्द के अनुसार वह ५०० रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से खून देने बाले लोगों से सौदा करके अबैध तरीके से बिना जांच पड़ताल के खून निकालकर एसएस हॉस्पिटल में जरूरतमंद लोगों को ढाई हजार से पांच हजार रुपये तक में सप्लाई करते थे। पकडे गए आरोपियों के मुताबिक़ इस गैंग का सरगना कोई और नहीं बल्कि शहर का नामचीन एसएस हॉस्पिटल के डॉक्टर का नाम लिया था। जिसके बाद पुलिस ने औपचारिक्ता पूरी करने के लिए प्राथमिकी में सरगना डॉक्टर का नाम अंकित कर लिया, लेकिन अभी तक न ही स्वास्थ्य विभाग और न ही पुलिस ने यह जानकारी की है कि अबैध तरीके से नशेड़ियों , नाबालिगों सहित संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त लोगों का खून निकालकर किन अस्पतालों में सप्लाई किया जा रहा था। इसके साथ ही एसएस हॉस्पिटल में खून चढ़ने के बाद हुई मरीजों की मौत का रिकार्ड भी नहीं खंगाला गया।
पूरे मामले को केबल कागजो में ही समेट कर रख दिया गया। खून के अबैध कारोबार मामले में पुलिस सहित स्वास्थ्य महकमे की जांच पर विराम लगा दिया गया था। पुलिस और स्वास्थ्य महकमे ने अपनी तरफ से खून के कारोबार के मुख्य अभियुक्त को पूरी राहत देकर क्लीन चिट देने का काम किया था।इस हॉस्पिटल में खूब जमकर लुटाई की जाती है अगर कोई गरीब पहुंच जाए तो उसे अपनी सारी घर ग्रहस्ती बेचकर हॉस्पिटल का भुगतान करना पड़ता है।अस्पाल में कर्मचारियों में कुछ दबंग किस्म के लोग रखे हुए हैं जो लोग मरीजों व उनके तीमारदारों को डराते धमकाते हैं।अस्पताल के सामने रोड पर अगर कोई अपनी बाइक खड़ी करता है उससे भी यह दबंग लोग पैसे लेते हैं हर तरफ लूट ही लूट है लेकिन प्रशासन कोई भी ध्यान नही देता है
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