कोरोना महामारी को खत्म करने के लिए भारत ने बनाया ये ‘ब्रह्मास्त्र’ प्लान ?

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नई दिल्ली । पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत भी कोरोना वायरस (coronavirus) की चपेट मे है । कोरोना से लड़ाई तो जारी है लेकिन इस महामारी को खत्म करने के लिए कोई कारगर तरीका नहीं मिलने तक ये जंग जीती नहीं जा सकती । दुनिया के तमाम देश कोरोना वैक्सीन (corona vaccine) पर प्रयोग कर रहे हैं लेकिन ये कितनी कारगर होगी और कब तक भारत पहुंचेगी, इस पर फिलहाल पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता । ऐसे में जरूरी है कोरोना से लड़ाई के लिए प्लान बी तैयार किया जाए । हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) कोरोना को हराने के प्लान में गेमचेंजर साबित हो सकती है। इसके लिए देश की एक बड़ी आाबादी में कोरोना के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पैदा होनी चाहिए । भारतीयों में अगर हर्ड इम्यूनिटी की ये क्षमता विकसित हो पाती है तो कोरोना से लड़ाई जीती जा सकती है ।

क्या होती है हर्ड इम्यूनिटी
चलिए सबसे पहले आपको बताते हैं आखिर क्या है हर्ड इम्यूनिटी और क्या भारत में इसका प्रयोग शुरू हो चुका है. जब बहुत सारे लोगों में किसी बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाती है । इस स्थिति में बचे हुए असंक्रमित लोगों को बीमारी चपेट में नहीं ले पाती । इस क्षमता को हर्ड इम्यूनिटी कहते हें । हर्ड इम्यूनिटी वैक्सीन के जरिये पैदा हो सकती है या फिर कोरोना संक्रमण के बाद ठीक होने पर प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए ।

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कोरोना महामारी को खत्म करने के लिए भारत ने बनाया ये ‘ब्रह्मास्त्र’ प्लान ?

हर्ड इम्यूनिटी कोरोना के खिलाफ कैसे ब्रह्मास्त्र साबित हो सकती है । इसे आप इस तरह से समझ सकते हैं कि न्यूमोनिया और मेनिन्जाइटिस जैसी बीमारियों की वैक्सीन देकर बच्चों को इसके प्रति इम्यून बनाने से वयस्क लोगों में बीमारियों की चपेट में आने की गुंजाइश काफी कम हो गई । ऐसे में भारत में अगर बड़ी तादाद में लोगों के अंदर कोरोना के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाए तो कोरोना को हराया जा सकता है। अब सवाल उठता है कि क्या भारत में हर्ड इम्यूनिटी का टेस्ट शुरू हो चुका है या फिर प्लान बी के तहत इसे शुरू करने की तैयारी की जा रही है । सवाल ये भी उठता है क्या दुनिया में किसी बीमार को हर्ड इम्यूनिटी के जरिए हराया गया है और क्या दुनिया में कई और देश भी हर्ड इम्यूनिटी के जरिए कोरोना को हराने की तैयारी कर रहे हैं । फिलहाल सरकार की ओर से हर्ड इम्यूनिटी टेस्ट की कोई औपचारिक प्रयास नहीं किया जा रहा है लेकिन देश में जो परिस्थितियां बन रही हैं, इससे भारतीयों में हर्ड इम्यूनिटी का टेस्ट भी हो जाएगा ।

 

क्या ‘ग्रीन जोन’ में शुरू हुआ हर्ड इम्यूनिटी टेस्ट?
कोरोना संक्रमण के आधार देश के जिलों को तीन जोन में बांटा गया है- ग्रीन, आरेंज और रेड जोन। देश के 43 प्रतिशत से ज्यादा जिले ग्रीन जोन में आते हैं, जहां पर लॉकडाउन थ्री में कुछ शर्तों के साथ लोगों को छूट मिल रही है। ऐसे में माना जा रहा है इन इलाकों में लोगों का हर्ड इम्यूनिटी टेस्ट भी हो जाएगा।

चलिए अब हम आपको बताते हैं ये कैसे होगा. सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की शर्तों के साथ ग्रीन जोन्स में दुकानें, बाजार, दफ्तर, ऑटो, टैक्सी, बस, कारोबारी और औद्योगिक गतिविधियों को शुरू करने को मंजूरी मिल चुकी है। इन जगहों पर लोग दूसरी जगहों पर जा रहे हैं। धीरे-धीरे काम धंधा भी शुरू हो रहा है. यानी 43 प्रतिशत जिलों में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा है।

इसे कुछ हद तक ही हर्ड इम्यूनिटी का टेस्ट कह सकते हैं क्योंकि ग्रीन जोन्स वे इलाके हैं जहां अब तक या तो एक भी कोरोना के केस नहीं आए हैं या फिर पिछले 21 दिनों से एक भी केस नहीं है। लेकिन सही मायनों में हर्ड इम्यूनिटी टेस्ट उस वक्त होता जब कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों यानि रेड जोन में इस तरह की छूट दी जाती. इस तरह से लोग बड़ी तादाद में कोरोना से संक्रमित होते और आखिरकार उनमें इसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती, जिसे हर्ड इम्यूनिटी कहा जाता।

रेड जोन में होता हर्ड इम्यूनिटी का असली टेस्ट!
आपके लिए ये जानना भी जरूरी है कि आखिरकार क्यों ग्रीन जोन में हर्ड इम्यूनिटी का टेस्ट पूरी तरह से नहीं किया जा सकता। ग्रीन जोन में संक्रमण का जोखिम बहुत ही कम है, इसलिए वहां पूरी तरह से सामान्य जनजीवन को भी हर्ड इम्यूनिटी का कुछ हद तक ही टेस्ट कह सकते हैं। फिलहाल, भारत सरकार रेड जोन में कोरोना के खतरे को देखते हुए कोई बड़ी छूट देने को तैयार नहीं है क्योंकि इससे कोरोना संक्रमितों की संख्या ज्यादा होने पर परेशानी बढ़ सकती है।

बगैर वैक्सीन यह संभव नहीं
हर्ड इम्यूनिटी को बगैर वैक्सीन के नामुमकिन करार देते हुए यह रिपोर्ट कहती है कि इससे हेल्थ सिस्टम ध्वस्त हो जाएगा और वायरस से मौतों की दर बढ़ेगी. भारत जैसे युवा आबादी वाले गरीब देशों में यह थ्योरी इसलिए कारगर नहीं होगी क्योंकि :

1: अव्वल तो विशेषज्ञों को ही कोविड 19 की इम्यूनिटी के बारे में ज़्यादा पता नहीं है कि यह कितने समय तक रहेगी या इससे कितनी सुरक्षा मिलेगी और क्या दोबारा संक्रमण होगा या नहीं.
2: भारत के लिए यह थ्योरी अनुमान के चलते दी गई है क्योंकि माना गया है कि यहां की ज़्यादातर आबादी युवा है इसलिए संक्रमण को झेल जाएगी और गंभीर स्थिति नहीं होगी.
3: अंतत: हर्ड इम्यूनिटी को एकमात्र रणनीति के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती. स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता, ज़्यादा टेस्टिंग, प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर सहयोग, हाई रिस्क से आबादी की सुरक्षा और अन्य ज़रूरी उपायों के साथ जब तक मज़बूत तंत्र तैयार न हो, हर्ड इम्यूनिटी भरोसे लायक रणनीति नहीं है.

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