मुंबई. एनडीए की सबसे पुरानी साझेदार रही शिवसेना ने 2019 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है. शिवसेना की मंगलवार को हुई एक अहम बैठक में इस बारे में फैसला लिया गया. शिवसेना ने कहा कि उसने गठबंधन बनाए रखने के लिए हमेशा ही समझौता किया, लेकिन बीजेपी ने शिवसेना को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. शिवसेना अब गरिमा के साथ चल सकेगी. पार्टी ने कहा कि वह लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी.
मुंबई के वर्ली में एनएससी ग्राउंड में मंगलवार को शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. इसमें सर्वसम्मति से उद्धव ठाकरे को एक बार फिर शिवसेना प्रमुख चुना गया. जबकि, शिवसेना युवा के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे को शिवसेना नेता चुना गया है. इस तरह आदित्य ठाकरे को शिवसेना में नंबर 2 की पोजिशन मिल गई है. बता दें कि शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे की जयंती पर 23 जनवरी को आदित्य ठाकरे को शिवसेना नेता बनाए जाने की चर्चा पहले से थी. शिवसेना प्रमुख के बाद शिवसेना नेता का पद सबसे अहम माना जाता है. इस पद के लिए चुने जाने के बाद आदित्य ठाकरे शिवसेना के राष्ट्रीय स्तर का चेहरा बन गए हैं.
बता दें कि शिवसेना नेता पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों के साथ साथ पार्टी की नीति निर्धारण में भी अहम भूमिका निभाता है. इसके पहले बाला साहब ठाकरे की जयंती पर शिवसेना के माउथपीस ‘सामना’ के संपादकीय में उन्हें याद किया गया. संपादकीय में लिखा गया, हिंदुस्तान आज खतरे में है. बाला साहब के द्वारा हिंदुत्व की नींव रखी गई और इस वजह से आज के राजनेता सत्ता का फल चख पा रहे हैं.बाला साहब ठाकरे की जयंती पर पीएम मोदी ने भी ट्वीट किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम ने लिखा, बाला साहब ठाकरे की जयंती पर उन्हें याद कर रहा हूं. वो हमेशा एक दिलेर नेता के तौर पर याद किए जाएंगे.
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