आपके फोन की जासूसी तो नहीं की जा रही सावधान हो जाईये दुनियां मे 50 हजार लोग है निशाने पर

खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय ग्रुप का दावा है कि दुनियाभर में इजराइली कंपनी एनएसओ (NSO) के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस से 10 देशों में 50 हजार लोगों की जासूसी हुई। भारत में भी अब तक 300 नाम सामने आए हैं, जिनके फोन की निगरानी की गई। इनमें सरकार में शामिल मंत्री, विपक्ष के नेता, पत्रकार, वकील, जज, कारोबारी, अफसर, वैज्ञानिक और एक्टिविस्ट शामिल हैं।

इस अंतरराष्ट्रीय ग्रुप में भारत का मीडिया हाउस द वायर भी शामिल था, जो जासूसी में टारगेट बने भारतीयों के नाम सामने लाया है। अब तक 38 पत्रकार, 3 प्रमुख विपक्षी नेता, 2 मंत्री और एक जज का नाम सामने आया है। द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है कि NSO अपने प्रोडक्ट पेगासस का लाइसेंस सिर्फ सरकारों को देता है। भारत सरकार का कहना है कि उसने पेगासस का इस्तेमाल नहीं किया। अगर उसने नहीं किया तो किसने भारतीय पत्रकारों, जजों, नेताओं और अफसरों की जासूसी कराई? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी जांच करानी चाहिए।

आइए समझते हैं कि यह मामला क्या हैजिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है?

पेगासस प्रोजेक्ट क्या है?

  • पेगासस प्रोजेक्ट दुनियाभर के 17 मीडिया संस्थानों के जर्नलिस्ट का एक ग्रुप है, जो एनएसओ (NSO) ग्रुप और उसके सरकारी ग्राहकों की जांच कर रहा है। इजराइल की कंपनी NSO सरकारों को सर्विलांस टेक्नोलॉजी बेचती है। इसका प्रमुख प्रोडक्ट है- पेगासस, जो एक जासूसी सॉफ्टवेयर या स्पायवेयर है।
  • पेगासस आईफोन और एंड्रॉयड डिवाइस को टारगेट करता है। पेगासस इंस्टॉल होने पर उसका ऑपरेटर फोन से चैट, फोटो, ईमेल और लोकेशन डेटा ले सकता है। यूजर को पता भी नहीं चलता और पेगासस फोन का माइक्रोफोन और कैमरा एक्टिव कर देता है।

पेगासस प्रोजेक्ट को NSO का डेटा कहां से मिला?

  • पेरिस के नॉन-प्रॉफिट जर्नलिज्म ऑर्गेनाइजेशन फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल के पास 2016 से NSO के ग्राहकों द्वारा टारगेट के रूप में चुने गए 50,000 से अधिक फोन नंबरों की जानकारी पहुंची थी। कब और कैसे, इसकी कोई जानकारी इन संगठनों ने नहीं दी है। तब उसने यह जानकारी गार्जियन, वॉशिंगटन पोस्ट समेत 17 न्यूज ऑर्गेनाइजेशन के साथ शेयर की। पिछले कुछ महीनों से इन मीडिया ऑर्गेनाइजेशन के 80 से अधिक पत्रकारों ने इस डेटा पर काम किया। इनके बीच कोऑर्डिनेशन का काम फॉरबिडन स्टोरीज का था।

जो डेटा लीक हुआ हैउसमें क्या है?

  • लीक हुआ डेटा 50,000 से अधिक फोन नंबरों की एक सूची है। यह नंबर उन लोगों के हैं, जिनकी 2016 के बाद से अब तक NSO के सरकारी ग्राहकों ने जासूसी कराई। इन्हें ही NSO ने पेगासस का सर्विलांस लाइसेंस बेचा था। डेटा में सिर्फ समय और तारीख है, जब इन नंबरों को निगरानी के लिए चुना गया या सिस्टम में दर्ज किया गया था।
  • डेटा के आधार पर कुछ नंबरों का सैम्पल निकालकर ग्रुप के पत्रकारों ने टारगेट्स से मोबाइल फोन लिए। उनके हैंडसेट की फोरेंसिक जांच एमनेस्टी की सिक्योरिटी लैब से कराई, जो इस प्रोजेक्ट में टेक्निकल पार्टनर बना।

क्या जो नंबर सामने आएउनकी जासूसी हुई?

  • पता नहीं। पत्रकारों के कंसोर्टियम का कहना है कि लीक हुआ डेटा सर्विलांस के लिए पहचाने गए टारगेट्स बताता है। इससे सिर्फ इतना पता चलता है कि इन लोगों के फोन को इन्फेक्ट करने को कहा गया था। दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि पेगासस जैसे स्पायवेयर ने इन मोबाइल नंबरों की जासूसी की कोशिश की है या नहीं। जासूसी हो सकी या नहीं, यह भी इस डेटा से पता नहीं चलता।
  • जो डेटा मिला है, उसमें कुछ लैंडलाइन नंबर भी हैं। इस पर NSO का कहना है कि इनकी निगरानी टेक्निकली असंभव है। पर कंसोर्टियम का दावा है कि यह नंबर टारगेट्स में शामिल थे, भले ही पेगासस से इन पर हमला हुआ हो या नहीं।
  • हालांकि, सूची में जो नंबर शामिल हैं, उनके मोबाइल फोन के छोटे सैम्पल की फोरेंसिक जांच हुई है। इसमें लीक हुए डेटा में पेगासस की एक्टिविटी शुरू होने का जो वक्त और तारीख लिखी थी, उसके अनुसार ही एक्टिविटी देखने को मिली है। इससे यह नहीं कह सकते कि इन फोन की जासूसी हुई भी या नहीं। इतना जरूर कह सकते हैं कि इन नंबरों को अलग-अलग सरकारों ने जासूसी के लिए चुना था।

 क्या भारत सरकार या किसी और सरकार ने जासूसी कराई?

  • कह नहीं सकते। लीक हुए डेटा में नंबरों को क्लस्टर में ऑर्गेनाइज किया गया है। यह इस बात का संकेत है कि यह सभी नंबर NSO के किसी क्लाइंट यानी किसी सरकार के टारगेट थे। पर किस सरकार ने किसे टारगेट किया, इसका दावा कोई नहीं कर सकता। NSO का दावा है कि वह 40 देशों में 60 ग्राहकों को अपने प्रोडक्ट बेचता है। पर उसने कभी भी इन देशों या ग्राहकों का नाम सामने नहीं रखा है।
  • किस देश ने किसकी जासूसी कराई, इसका खुलासा मीडिया ग्रुप कर रहे हैं। इसमें वे टारगेट्स के पैटर्न के साथ ही उस समय उनके महत्व को एनालाइज कर रहे हैं। इस आधार पर मीडिया ग्रुप्स ने 10 सरकारों की पहचान की, जिन्होंने टारगेट्स चुने। इनमें अजरबैजान, बहरीन, कजाकिस्तान, मैक्सिको, मोरक्को, रवांडा, सऊदी अरब, हंगरी, भारत और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

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