केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अब तक 4 पार्टियां अविश्वास प्रस्ताव दे चुकी हैं। इन प्रस्तावों पर मंगलवार को संसद में विचार हो सकता है। इन पार्टियों में टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, कांग्रेस और सीपीएम शामिल हैं।
हालांकि, केंद्र सरकार को इस प्रस्ताव से कोई खतरा नहीं है। बता दें कि इससे पहले भी अमित शाह ने दावा किया है कि उनकी सरकार किसी भी प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार है और उनके पास बहुमत है।
वहीं YSR कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि 5 अप्रैल को सत्र खत्म होने से पहले उनके सभी सांसद इस्तीफा दे देंगे।
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विपक्ष को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए 50 सांसदों का समर्थन चाहिए। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सबसे पहले लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन नोटिस देने वीला पार्टी के सांसद से इसे पेश करने के लिए कहेंगी।
इसके बाद नियम के तहत 50 सांसदों को इस अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन करना होगा। अगर इससे कम सांसद हुए तो अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के 48 सांसद हैं। वहीं AAP, विपक्षी दल और लेफ्ट पार्टियां भी सरकार के खिलाफ हैं। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए जरूरी 50 सांसदों का समर्थन कांग्रेस जुटा लेगी। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है।
चार पार्टियां सीपीआई-एम (9) + टीडीपी (16)+ कांग्रेस (48) + YSR कांग्रेस (9) अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दे चुकी हैं। इन पार्टियों के कुल सांसदों की संख्या 82 है।
NDA में 56 दल है और लोकसभा में इनके सांसदों की संख्या 314 है। ऐसे में सरकार को बहुमत के लिए 271 की जरूरत है, जो कि भाजपा के पास अभी भी है। इसलिए सरकार पर इस अविश्वास प्रस्ताव का असर नहीं होगा।
बता दें कि लोकसभा में कुल 545 सीटें हैं। जिसमें बीजेपी के 275 सांसद हैं। वहीं कांग्रेस के 48, AIADMK के 37, तृणमूल कांग्रेस के 34, शिवसेना के 18, टीडीपी के 16, बीजेडी के 20, टीआरएस के 11, सीपीआई (एम) के 9, YSR कांग्रेस के और समाजवादी पार्टी के 7। इनके अलावा सदन में 26 अन्य पार्टियों के 56 सांसद है। वहीं 5 सीटें अभी भी खाली पड़ी हैं।
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