हिमाचल प्रदेश किसानों के लिए खुशखबरी! जैविक खेती को बढ़ावा देने और आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने शुरू की हैं कई नई योजनाएं

हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी! जैविक खेती को बढ़ावा देने और आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार ने शुरू की हैं कई नई योजनाएं | क्या आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश सरकार किसानों की आय को दोगुना करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है? जी हाँ, हाल ही में राज्य सरकार ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं, जिनसे किसानों को सीधा लाभ होगा। आइये, विस्तार से जानते हैं इन योजनाओं के बारे में।

वर्मी कंपोस्ट योजना: किसानों की आय में होगी बढ़ोतरी

हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, सरकार किसानों से वर्मी कंपोस्ट 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदेगी। यह योजना किसानों की आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह न केवल जैविक खेती को बढ़ावा देगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी। किसानों को वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे उच्च गुणवत्ता का वर्मी कंपोस्ट तैयार कर सकें और अधिक लाभ कमा सकें। इस योजना से राज्य के हजारों किसानों को फायदा होने की उम्मीद है।

योजना का लाभ कैसे उठाएँ?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क करना होगा। विभाग द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। वर्मी कंपोस्ट की गुणवत्ता जांचने के लिए विभाग द्वारा निरीक्षण भी किया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश शिवा योजना: बागवानी को मिलेगा बढ़ावा

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बागवानी को बढ़ावा देने के लिए ‘हिमाचल प्रदेश शिवा’ योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत, 7 जिलों में बागवानी विकास का विस्तार किया जाएगा। इस योजना पर 1,292 करोड़ रुपये की लागत आएगी और यह 6,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को कवर करेगी।

किन फसलों को मिलेगा बढ़ावा?

इस योजना से संतरा, अमरूद, लीची और बेर जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा। इससे 15,000 से अधिक किसान परिवारों को सीधा लाभ होगा। इस योजना से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि राज्य के निर्यात में भी वृद्धि होगी।

हिम भोग आटा: प्राकृतिक खेती को मिलेगा प्रोत्साहन

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘हिम भोग आटा’ ब्रांड भी पेश किया है। यह आटा मक्के और गेहूँ से बनाया जाएगा, जोकि प्राकृतिक खेती के तरीके से उगाए जाएंगे। इस पहल से किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और उन्हें रासायनिक खादों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।

प्राकृतिक खेती के फायदे

प्राकृतिक खेती से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ती है बल्कि इससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। यह मिट्टी की उर्वरकता को बनाए रखने में भी मदद करता है।

जैविक खेती का भविष्य उज्जवल

हिमाचल प्रदेश सरकार की ये योजनाएं राज्य के किसानों के लिए एक वरदान साबित हो सकती हैं। इन योजनाओं से न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पर्यावरण के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। सरकार द्वारा किसानों को प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराए जाने से जैविक खेती और भी आसान हो जाएगी।

Take Away Points:

  • हिमाचल प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई नई योजनाएं चला रही है।
  • वर्मी कंपोस्ट योजना से किसानों को 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा।
  • हिमाचल प्रदेश शिवा योजना से बागवानी को बढ़ावा मिलेगा।
  • हिम भोग आटा ब्रांड से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

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