जम्‍मू-कश्‍मीर: बड़ा झटका यासिन मलिक को, नहीं मिली बैन से राहत

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जम्‍मू-कश्‍मीर के अलगाववादी संगठन जेकेएलएफ और उसके मुखिया यासिन मलिक को करारा झटका लगा है। गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम ट्राइब्‍यूनल ने भी जम्‍मू-कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट को ‘गैरकानूनी असोसिएशन’ करार दिया है। जेकेएलएफ पर 22 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रतिबंध लगाया था। ट्राइब्‍यूनल ने पाया कि जेकेएलएफ-वाई को गैरकानूनी संगठन करार देने के लिए ‘पर्याप्‍त सबूत’ हैं।

सुनवाई के दौरान जेकेएलएफ के वकील आरएम तुफैल ने दलील दी कि यासिन मलिक ने ‘कभी भी प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से अलगाव या आतंकवाद में हिस्‍सा नहीं लिया।’ तुफैल ने कहा, ‘यासिन मलिक ने कभी भी ऐसा बयान नहीं दिया जो राष्‍ट्र विरोधी हो या भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को भंग करता हो।’ ट्राइब्‍यूनल ने कहा कि मलिक के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं जिनमें सबसे पुरानी वर्ष 1987 की है।

प्राधिकरण ने कहा कि यासिन मलिक ने लगातार विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। ये नारे राज्‍य की संप्रभुता के खिलाफ थे और बिना किसी संदेह के राष्‍ट्रविरोधी थे। बता दें कि केंद्र ने 22 मार्च को जेकेएलएफ पर प्रतिबंध लगा दिया था। कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठक में यह फैसला किया गया था। केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने बताया था कि केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) को गैरकानूनी असोसिएशन घोषित किया। यह कदम सरकार के द्वारा आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत उठाया गया है।

अलगाववादी विचारधारा को हवा दी, 37 से ज्यादा केस
गृह सचिव ने आगे कहा कि यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने घाटी में अलगाववादी विचारधारा को हवा दी और यह 1988 से हिंसा और अलगाववादी गतिविधियों में सबसे आगे रहा है। राजीव गौबा ने बताया कि जम्मू और कश्मीर पुलिस के द्वारा JKLF के खिलाफ 37 एफआईआर दर्ज की गई हैं। सीबीआई ने भी दो केस दर्ज किए जिसमें से एक IAF जवान की हत्या का मामला भी शामिल है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी एक केस दर्ज किया है, जिसकी जांच जारी है। आपको बता दें कि जेकेएलएफ पर आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगता रहा है। यासीन मलिक पर आरोप है कि 1994 से भारत विरोधी गति‍विधियां चलाते थे।

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