चुनावी कुरुक्षेत्र में Congress पांडव है और BJP कौरव है, जानिये किशनजी कहां है ?

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लोकसभा के आम चुनाव वैसे तो अभी दूर है. अगले साल April में चुनाव होने है लेकिन जिस तरह से भाजपा और कांग्रेस ने तैयारिया शरू की है उससे ऐसा लगता है की आम चुनाव कभी भी हो शकते है. जहा तक कोंग्रेस का सवाल है टी भारत के सब से पुराने दल के युवा अध्यक्ष राहुल गाँधी ने चुनाव का बिगुल बजाते हुवे कह दिया की चुनावी महाभारत में कोंग्रेस पांडव है और बीजेपी कौरव है. कांग्रेस ने युध्ध रेखा खिंच ली है. चुनाव को कुरुक्षेत्र करार कर दिया और कार्य्कर्ताओको चुनाव के लिए तैयार रहने को आहवान भी कर दिया. कुरुक्षेत्र में कौन कहा है यह तो तय हो गया लेकिन भगवान् श्री कृष्ण कहा है ?

आदि युग पुरुष श्री कृष्णा के कई नाम है. उन्हें प्रेम से किशन महाराज भी कहते है. राहुल ने अपने आप को पांडव तो कह दिया लेकिन किशनजी कहा है ? किशनजी कहे तो इस देश का मतदाता. आखिर एक आम मतदाता ही तो तय करेंगा की लोकसभा के चूनाव के बाद दिल्ही की गद्दी पर कौन बैठेंगा .

फिर से मोदी या राहुल. महाभारत में कहा गया है की किशनजी ने पांडवो को साथ दिया तभी १०० कौरवो के सामने पांच पांडव जित पाए थे. मतदाता लोकतंत्र में राजा होता है लेकिन एक ही दिन का. चुनाव के बाद इसी राजा को कोई पूंछता तक नहीं की आप की समस्या क्या है..! चुनाव से पहले आम मतदाता के इर्दगिर्द सभी दलों के प्रत्याशी हाथ जोड़ कर कहता है की आपका कीमती और पवित्र वोट मुझे ही दे. ओर चुनाव खत्म होते है-आप कौन  हैजी…?!

जैसे श्री कृष्णा जी ने पांडवो  को साथ दिया और उनकी जित हुई ऐसे ही अगले आम चूनावरूपी महाभारत में मतदातारूपी किशनजी पांडव यानी की कांग्रेस का साथ देंगा तो ही उसका हाथ मजबूत होंगा. लेकिन इस किशनजी को मन्नाने के लिए कांग्रेस के पास क्या है ? कांग्रेस को सही सही विझन के साथ मतदाता के पास जाना होंगा. किसी अन्य दल को कौरव कह देने से महाभारत नहीं जीती जा शकती. बीजेपी यूपी में दो सीटों पर बहोत ही बुरीतरह से हारी है.

लेकिन आम चूनाव्  में भी ऐसा ही होंगा यह मान कर चलना किसी सेनापति के लिए उसकी नादानियत होंगी. जैसे किशनजी चंचल मन के है वैसे ही भारत का मतदाता भी चंचल मन का है. इसका सबूत गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव का नतीजा है. लोगो ने कहा की हम योगीजी के साथ लेकिन सीएम योगी के साथ नहीं. ऐसे मतदाता को अपनी और लाने में सभी दलों को अगले चुनाव में पापड बेलने पड़ेगे. अगले महाभारत का फैंसला आम मतदाता तय करेंगा और वह जिस के साथ होंगा वो ही पांडव कहलायेंगा.

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