करारी अमारी जुलूस में उमड़ा अजादारों का जन सैलाब

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रिपोर्टर -विकास कुमार गौतम

करारी-कौशाम्बी – कस्बे के हजरतगंज स्थित हुसैनिया शरीफाबाद (तेलियापर) में मोहर्रम का आखिरी अमारी जुलूस निकाला गया। कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होकर देर शाम तक चला। शुक्रवार को कस्बे के हजरतगंज मोहल्ला स्थित हुसैनिया शरीफ़ाबाद (तेलियापर) में अहले हरम के लुटे हुये काफिले की याद में जुलूसे अमारी निकाला गया। इसकी शुरुआत तेलावते कुरआन ए पाक से हुई। मौलाना अहमद रेज़ा ने पहली मजलिस पढ़ी।

इसके बाद जावेद अमीर रिज़वी ने तकरीर की उन्होंने अहले हरम के लुटे हुये काफिले का ज़िक्र किया और सबसे पहले स्याह परचम बरामद हुआ, फिर अलम हजरत अब्बास,जूलजना ह, जनाबे ज़ैनब, उम्मे कुलसूम और जनाबे फिज़्ज़ा की अमारी बरामद हुई। अजादारों की आखों से आंसू बहने लगे। इसके बाद मीसम गोपालपुरी ने नौहा पढ़ा– ऐसा किसी बच्ची का जनाज़ा नही देखा क्या क्या नही देखा- किस आस से कहती थी दमे नज़ा सकीना तुमने मुझे मरते हुए बाबा नही देखा।

इस नौहे पर नौजवानों ने दिल खोलकर मातम किया। इसके बाद कब्रे सकीना पर मौलाना जवाद हैदर जव्वादी ने तकरीर की तो हर आंख सकीना की बेकसी को यादकर भर आईं। जुलूस क़दीमी रास्तों से होता हुआ शिया जामा मस्जिद पहुंचा मौलाना ज़मीर हैदर ने इमाम बारगाह रौशन अली में तकरीर की। जुलूस वापस हुसैनिया शरीफ़ाबाद पहुंचा जहां आखिरी तकरीर हसन मोहम्मद ने किया और एक एक कर शबीहें रुखसत हुई। अलविदाई नौहा नजफी ने पढ़ा- कर्बला में सोने वालों माह पारो अलविदा, इस नौहे पर नवजवानों ने जमकर मातम किया। मौलाना मोहम्मद अख़्तर रिज़वी ने ज़्यारत पढ़ा कर जुलूस खत्म किया ।

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