जयपुर। सोशल मीडिया, आग्मेंटेड रियल्टी, स्पोर्ट्स मीडिया के विकास में टेक्नोलॉजी खेलों के भविष्य को बदल रही है। टेक्नोलॉजी खेलों की परफॉर्मेंस मेजरमेंट, टिकटिंग, मार्केटिंग, इकोनॉमिक मैनेजमेंट सहित सभी पहलुओं में धीरे-धीरे प्रवेश कर रही है। लीग क्रियेशन, वीयरेबल स्पोर्टिंग इक्युपमेंट, इंटेलीजेंट टिकटिंग एवं ब्रॉडकास्टिंग, ई-स्पोर्ट्स व फैंटंसी स्पोर्ट्स, स्पोर्ट्स टूरिज्म और स्पोर्ट्स फेस्टिवल जैसे ट्रेंड्स दर्शाने के लिए कुछ नाम हैं। यह कहना था इलाजिग, तुर्की के स्पोर्ट्स साइंसेज की फैकल्टी, डॉ. सेबहट्टीन डेविसोग्लुय का। वे मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर (एमयूजे) में ‘फिजीकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंस‘ विषय पर आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस (आईसीपीईएसएस) के दूसरे दिन संबोधित कर रहे थे। वे कॉन्फ्रेंस के ‘प्रिलिम्नरी सेशन-2‘ के मुख्य वक्ता थे। 11 जनवरी तक चलने वाली यह कॉन्फ्रेंस एमयूजे के डिपार्टमेंट ऑफ आर्ट्स (फिजीकल एजुकेशन) और स्कूल ऑफ ह्यूमेनिटीज की ओर से आयोजित की जा रही है।
प्रोफेशनल एथेलीट्स की मेंटल ट्रेनिंग की आवश्यकता के बारे में बात करते हुए ओ. पी. जिंदल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, संजीव पी. साहनी ने कहा कि एथेलीट्स को अपने दृष्टिकोण व मानसिक कौशल में सुधार करने तथा खेलों में प्रदर्शन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए मानसिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। एथलीट्स में तेजी से मानसिक दबाव बढ़ रहा हैं। यह मानसिक दबाव एथलीट्स की व्यक्तिगत अथवा व्यावसायिक जीवन में मीडिया के फोकस, परफॉर्मेंस से स्वयं को अलग करने में असमर्थता, बाहरी परिस्थितियों से प्रदर्शन के प्रभावित होने को स्वीकार करने में असमर्थता जैसे कई कारणों की वजह से उत्पन्न हो रहा है। स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट्स का चयन अंतिम समय में नहीं होना चाहिए, बल्कि इन्हें प्रतिभाओं की पहचान से लेकर प्रबंधन तक एथेलीट्स के साथ मिलकर करना चाहिए।
खेलों में प्रतिभा की पहचान के लिए विभिन्न मॉडलों की जानकारी देते हुए लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर के प्रोफेसर व डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर), प्रो. जे. पी. वर्मा ने प्रतिभागियों को ‘टैलेंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम इन स्पोर्ट्स (टीआईएसएस) एप्लिकेशन के दो प्रोजेक्ट्स के बारे में बताया। एक प्रोजेक्ट ‘स्पोर्ट्स टैलेंट की पहचान करने‘ में मदद करता है, जबकि दूसरा प्रोजेक्ट ‘विशिष्ट खेल की प्रतिभा की पहचानने’ का कार्य करता है। खिलाड़ी के विशिष्ट व आनुवंशिक मापदंडों का उपयोग करते हुए इसके टेस्ट व्यक्ति की खेल में क्षमता की पहचान करने में बेंचमार्क, सहजता या निष्पक्षता प्रदान करते हैं।
इस सेशन की अध्यक्षता डॉ. गुरदीप सिंह द्वारा की गई और सह-अध्यक्षता प्रो. राजेश वर्मा ने की। दोपहर में एक्सरसाइज प्रिस्क्रिप्शन, फिजीकल फिटनेस एंड डोपिंग, स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स व स्पोर्ट्स पेडगॉजी, योगा, मेंटल हैल्थ एंड स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन, टेक्निकल इनोवेशन व एंटरेप्रेन्योरशिप इन स्पोर्ट्स जैसे विषयों पर चार पैरेलल सेशन आयोजित किए गए। इसके बाद पोस्टर प्रेजेंटेशन सेशन और फिर विभिन्न पैरेलल सेशन आयोजित किए गए। ये सेशन एजिंग एंड एक्सरसाइज फिजियोलॉजी, एक्सरसाइज फिजियोलॉजी, डोपिंग एंड इंटरनेशनल रिलेशंस, सोश्यलाइजेशन, इंडस्ट्रियलाइजेशन एंड स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इमर्जिंग ट्रेंड्ज एंड चैलेंजेज इन फिजीकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज और इमर्जिंग ट्रेंड्ज एंड चैलेंजेज इन फिजीकल एजुकेशन एंड फिजीकल लिटरेसी जैसे विषयों पर रहे।
इस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका, तुर्की, ब्रिटेन, स्लोवाकिया, बांग्लादेश सहित 15 देशों के करीब 500 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। कॉन्फ्रेंस के तीनों दिन प्रिलिमनेरी व टेक्निकल सैशन आयोजित किए जा रहे हैं। कॉन्फ्रेंस के उप-विषयों में एक्सरसाइज प्रिस्क्रिप्शंस एंड फिजीकल फिटनेस, मेंटल हैल्थ, योगा एंड रिसर्च पेडगॉगी, स्पोर्ट्स मेडिसिन, एजिंग तथा एक्सरसाइज फिजियोलॉजी शामिल हैं।
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