जेम्स कैमरून की नई फिल्म: हिरोशिमा और नागासाकी की दर्दनाक दास्तां

जेम्स कैमरून, जिनके नाम पर फिल्मों की ऐसी ग्रैंडनेस और कहानी कहने का हुनर है कि दर्शक अपनी सीटों से चिपके रह जाते हैं, एक नई फिल्म बनाने जा रहे हैं! “टर्मिनेटर,” “एलियंस,” और “टाइटैनिक” जैसी ब्लॉकबस्टर दे चुके कैमरून, ‘अवतार’ फ्रैंचाइज़ी के बाद अब एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम करने जा रहे हैं जो इतिहास के सबसे भयावह अध्यायों में से एक पर आधारित है। इस फिल्म का स्केल, कैमरून की विज़न के साथ, आपको निश्चित रूप से अपनी सीट से बांध कर रखेगा।

जेम्स कैमरून का नया प्रोजेक्ट: हिरोशिमा और नागासाकी की कहानी

हाल ही में डेडलाइन के साथ अपनी अगली फिल्म के बारे में जानकारी साझा करते हुए, कैमरून ने खुलासा किया कि उनका यह नया प्रोजेक्ट, पिछले साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक, “ओपेनहाइमर,” से जुड़ा हुआ है। “ओपेनहाइमर” जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर की जीवन कहानी पर आधारित थी, जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका को दुनिया का पहला परमाणु बम बनाने में मदद की थी। हालांकि, “ओपेनहाइमर” में मुख्य रूप से अमेरिका की भूमिका को दिखाया गया था। फिल्म में हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों के पीड़ा का जापान पर क्या असर पड़ा, उस पर ज्यादा फोकस नहीं था।

क्रिस्टोफर नोलन से इस पहलू के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने उम्मीद जताई थी कि कोई और फिल्मकार इस घटना के जापानी पहलू को बड़े पर्दे पर दिखाएगा। और अब, कैमरून उस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। उन्होंने चार्ल्स पेलेग्रीनो की आने वाली किताब “घोस्ट्स ऑफ हिरोशिमा” के अधिकार खरीद लिए हैं, जो अगस्त 2025 में परमाणु बम गिराए जाने की 80वीं वर्षगांठ पर रिलीज़ होगी। इसके अलावा, कैमरून ने पेलेग्रीनो की 2015 की किताब “लास्ट ट्रेन फ्रॉम हिरोशिमा” के अधिकार भी खरीद लिए हैं। उन्होंने कहा है कि जैसे ही “अवतार” का निर्माण पूरा होगा, वह इन दोनों किताबों को मिलाकर एक शानदार फिल्म बनाएंगे।

‘घोस्ट्स ऑफ हिरोशिमा’ और ‘लास्ट ट्रेन फ्रॉम हिरोशिमा’: दो कहानियाँ, एक विनाशकारी घटना

ये दोनों किताबें अलग-अलग कोण से परमाणु बम के प्रभाव को दर्शाती हैं, हिरोशिमा और नागासाकी दोनों शहरों की त्रासदी को दर्शाने का एक अलग और मार्मिक दृश्य। फिल्म में, हम इतिहास की गहराई में उतरेंगे, इस भयावह घटना के शिकार लोगों की भावनाओं और अनुभवों को महसूस करेंगे। यह एक ज़रूरी कहानी है जो जंग के भयानक परिणामों को दिखाती है।

एक वादा, एक कहानी: सुतोमू यामागुची का जीवन

कैमरून की आगामी फिल्म दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एक जापानी व्यक्ति की सच्ची कहानी पर आधारित होगी, जो हिरोशिमा और नागासाकी दोनों परमाणु बम विस्फोटों से बच गया था। कैमरून ने कहा कि वह कई सालों से इस विषय पर फिल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह तय करने में मुश्किल हो रही थी कि वे इसे कैसे बनाएं।

कैमरून ने डेडलाइन को बताया, “मैं सुतोमू यामागुची से उनके निधन से कुछ दिन पहले मिला था, जो हिरोशिमा और नागासाकी दोनों के जीवित बचे थे। वह अस्पताल में थे। वे अपनी कहानी की मशाल हमें सौंप रहे थे, इसलिए मुझे इसे करना ही होगा। मैं इससे बच नहीं सकता।” कैमरून और पेलेग्रीनो ने यामागुची से वादा किया था कि उनके अद्वितीय और भयावह अनुभव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाएगा।

सुतोमू यामागुची: दो परमाणु बमों का एकल जीवित साक्षी

जापान में कम से कम 160 लोग ऐसे थे जो हिरोशिमा और नागासाकी दोनों शहरों पर परमाणु बम गिरने से प्रभावित हुए थे। लेकिन, जापान की सरकार के अनुसार, सुतोमू यामागुची अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जो दोनों परमाणु बमों से बच गए थे।

नागासाकी के रहने वाले एक नौसेना इंजीनियर सुतोमू यामागुची काम से हिरोशिमा गए हुए थे। 6 अगस्त, 1945 को वापस जाते समय, वह अपना एक ज़रूरी दस्तावेज़ लेना भूल गए और वापिस उसी स्थान पर गए जहां वह रुके हुए थे। इसी दौरान हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिरा दिया गया। वह घटनास्थल से केवल 3 किलोमीटर दूर थे। उन्होंने आसमान में अमेरिकी विमानों को देखा, और फिर चमकते प्रकाश और तेज आवाज ने उनके कानों के पर्दे फाड़ दिए। उनके शरीर का आधा हिस्सा जल गया था। घायल अवस्था में सुतोमू पूरी रात हिरोशिमा के एक आश्रय में रहे, और फिर नागासाकी चले गए।

9 अगस्त की सुबह उन्होंने घायल होने के बाद भी काम के लिए रिपोर्टिंग की और अपने सहयोगियों को बताया कि हिरोशिमा में एक बम ने शहर को तबाह कर दिया। लेकिन सुबह 11 बजे, उनके सुपरवाइजर ने उन्हें ‘पागल’ कहकर ताना मारा, और उसी क्षण नागासाकी पर दूसरा बम गिरा दिया गया। वह फिर से विस्फोट के स्थान से 3 किलोमीटर दूर थे!

एक परिवार की त्रासदी, एक हीरो की कहानी

इस घटना से यामागुची का जीवन हमेशा के लिए बदल गया। उन पर जीवन भर विकिरण का प्रभाव पड़ा। सुतोमू यामागुची की 93 साल की आयु में मृत्यु हो गई और उस समय उन्हें पेट का कैंसर था। उनकी कहानी इतिहास के सबसे विनाशकारी क्षणों की गहराई में हमारे दिलों को झकझोर देती है।

निष्कर्ष: कैमरून की फिल्म एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

जेम्स कैमरून द्वारा बनाई जा रही यह फिल्म, न केवल दर्शकों को थ्रिल देगी, बल्कि एक भयानक इतिहास का दर्दनाक पहलू भी सामने लाएगी। सुतोमू यामागुची के अनुभव को बड़े पर्दे पर प्रदर्शित करना एक गहराई तक जाता प्रोजेक्ट है। इस कहानी की रिलीज़ के साथ, आने वाली पीढ़ियों को इस विनाशकारी युद्ध और उसके प्रभावों के बारे में जानकारी मिलेगी।

टेक अवे पॉइंट्स

  • जेम्स कैमरून हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु बम विस्फोट से बचने वाले सुतोमू यामागुची के जीवन पर आधारित एक फिल्म बना रहे हैं।
  • यह फिल्म इस युद्ध और उनके भयावह प्रभाव को याद दिलाएगी।
  • फिल्म ‘ओपेनहाइमर’ के बताए गए इतिहास के दूसरी तरफ की तस्वीर दिखाएगी।
  • यह फिल्म अगस्त 2025 में ‘घोस्ट्स ऑफ हिरोशिमा’ के रिलीज़ होने के बाद आ सकती है।

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