महाराष्ट्र में सरकार गठन की राजनीति: क्या है असली पेंच?
महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन की घोषणा में हो रही देरी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बीजेपी के प्रचंड बहुमत के बाद भी, सीएम पद की कुर्सी पर कौन बैठेगा, यह सवाल अभी भी जवाब मांग रहा है। क्या है असली पेंच? आइये जानते हैं इस राजनीतिक ड्रामे के पीछे की पूरी कहानी।
क्या फडणवीस होंगे सीएम? शिंदे की भूमिका क्या होगी?
सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस का नाम लगभग तय करने का संकेत दिया है। हालाँकि, शिंदे शुरुआत में उपमुख्यमंत्री पद से ही संतुष्ट थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने रुख को नरम किया। मगर शिंदे गृह मंत्रालय को अपने पास रखने के इच्छुक हैं, और यहीं से शुरू होती है इस सियासी ड्रामे की असली कहानी। शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि शिंदे को कुछ महत्वपूर्ण विभाग मिलने चाहिए जिससे पार्टी और मजबूत हो।
क्या हैं शिंदे की मांगे?
शिंदे की महत्वाकांक्षाएं सीमित नहीं हैं। वे महाराष्ट्र में पार्टी की मजबूती के लिए कुछ अहम मंत्रालयों की मांग कर रहे हैं। इन मांगों को पूरा न होने से पार्टी विधायकों में असंतोष पैदा हो सकता है।
अजित पवार की महत्वाकांक्षाएं और विभागों का बँटवारा
अजित पवार की नज़र उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ वित्त विभाग पर है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी वित्त और योजना विभाग अपने पास रखना चाहती है। पवार ने कृषि, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, महिला एवं बाल कल्याण जैसे अन्य अहम विभागों पर भी अपना दावा ठोका हुआ है। विभागों के बँटवारे को लेकर चली आ रही इस खींचतान ने सरकार के गठन में देरी को और बढ़ाया है।
मंत्रिपदों का बँटवारा: क्या होगा फॉर्मूला?
सूत्रों के अनुसार, मंत्री पदों के बँटवारे में 6 विधायकों पर 1 मंत्री पद के अनुपात पर विचार किया जा रहा है। इस हिसाब से बीजेपी को 21-22, शिंदे गुट को 10-12, और अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट को 8-9 मंत्री पद मिल सकते हैं। कुल मंत्री पदों की संख्या 43 से अधिक नहीं होगी।
महाराष्ट्र में सरकार गठन: क्या हैं आगे के कदम?
मुंबई में महायुति के नेताओं की एक अहम बैठक हुई जिसके बाद दिल्ली में भी बैठकें जारी रहीं। विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और सभी दल अपने-अपने हिस्सेदारी को लेकर विचार-विमर्श कर रहे हैं। यह स्पष्ट है कि नई सरकार के गठन में अभी और वक्त लगेगा।
चुनावी नतीजे और सियासी समीकरण
चुनावों के नतीजे भले ही बीजेपी के पक्ष में रहे, पर सरकार के गठन को लेकर चल रहे गतिरोध ने एक नई सियासी बहस छेड़ दी है। यह सब एक दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप और सहयोगी दलों की अपनी-अपनी राजनीति का ही नतीजा है।
टेक अवे पॉइंट्स
- महाराष्ट्र में सरकार के गठन में हो रही देरी का मुख्य कारण सहयोगी दलों के बीच मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर गतिरोध है।
- शिंदे और पवार अपनी-अपनी शर्तों के साथ आगे बढ़ रहे हैं जिससे बीजेपी को मजबूती से फैसला लेने में परेशानी हो रही है।
- यह सियासी गतिरोध महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक नई चुनौती है जिसका समाधान जल्द ही निकलना बेहद ज़रूरी है।

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