पौष्टिकता से लबरेज पहाड़ी व्यंजन लुभाएंगे पर्यटकों को

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देहरादून। उत्तराखंड जड़ी-बूटियों और मसालों का भंडार है, जो अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं। आयुर्वेद के जानकार सदियों से इनका उपयोग करते आए हैं। इसे देखते हुए गढ़वाली व कुमांऊनी व्यंजनों की समृद्ध विरासत के साथ ‘हिमालयन इम्युनिटी क्वीजीन’ नाम से उत्तराखंड को ‘खान पान पर्यटन केंद्र’ के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने एक वक्तव्य में उक्त बात कही। उन्होंने कहा कि हमारा पारंपरिक भोजन मंडुए की रोटी, लिंगुड़े की सब्जी समेत अन्य व्यंजन पौष्टिकता से लबरेज हैं। खान-पान में ऐसे व्यंजनों पर खास फोकस किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले पर्यटक इनका आनंद उठा सकें। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने को नए पर्यटक स्थलों के विकास, साहसिक व धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि देहरादून-मसूरी रोपवे का पीपीपी मोड में निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट हाउस का जीर्णोद्धार कर उसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि टिहरी झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने को प्रयास जारी हैं। टिहरी में वाटर स्पोट्र्स डेस्टिनेशन थीम विकसित करने को कंसल्टेंट की नियुक्ति कर दी गई है। उन्होंने कहा कि गांव लौटे प्रवासियों के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना में आसान ऋण का प्रविधान किया गया है। साथ ही पलायन रोकने के लिए होम स्टे योजना में अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कोरोना संकट के कारण पर्यटन उद्योग से जुड़े व्यवसायियों को सरकार हरसंभव सहयोग दे रही है।

 

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