नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से राजीव गांधी को लेकर दिए गए बयान को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली की चुनाव राजीव गांधी के सन्मान के नाम पर लड़ने की कांग्रेस को चुनौती दी थी। इसको लेकर अब कांग्रेस पूरी तरह मैदान में आ गई है।
आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को खुली चुनौती दी है और कहा की नॉटबंधी, GST और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आखरी दो चरण का चुनाव लड़ कर दिखाए। दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी दोनों ही बुधवार को मैदान में उतर रहे हैं। प्रियंका गांधी ने रोडशो किया और तल्ख अंदाज में बीजेपी को चुनौती दी।
उन्होंने कहा, एक दिल्ली की लड़की आपको चुनौती दे रही है कि आखिरी के दो चरण नोटबंदी पर लड़िए, जीएसटी पर लड़िए और महिलाओं की सुरक्षा पर लड़िए। रोडशो के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा, आपने (बीजेपी) देश के नौजवानों से झूठे वादे किए, आप उन वादों पर चुनाव लड़िए। प्रियंका ने कहा कि उनकी हालत स्कूल के बच्चों की तरह हो गई है।
वे (बीजेपी) होमवर्क नहीं पूरा कर पाए हैं और अब स्कूल के बच्चों की तरह बहानेबाजी कर रहे हैं। क्या करें नेहरू जी ने मेरा पर्चा ले लिया, मैं क्या करूं इंदिरा जी ने कागज की कश्ती बना दी मेरे होमवर्क की और कहीं पानी में डुबो दी। हरियाणा की एक रैली में भी प्रियंका ने पीएम मोदी की तुलना दुर्योधन से करते हुए दिनकर की कविता पढ़ी थी। इससे पहले प्रधानमंत्री ने उनके पिता और प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर 1 कहा था। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत अन्य कांग्रेसी नेताओं ने इसकी तीखी आलोचना की। प्रियंका गांधी के दुर्योधन बाले बयान के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि 23 तारीख को पता चल जाएगा कि कौन अर्जुन है और कौन दुर्योधन।
12 मई को छठे चरण में दिल्ली में मतदान होने हैं। ऐसे में बीजेपी, कांग्रेस और AAP के दिग्गज नेता दिल्ली में हुंकार भरने लगे हैं और आरोप प्रत्यारोप जोर हो गए हैं। जानकारों के मुताबिक राजीव गांधी का जिक्र करके पीएम मोदी दिल्ली में सिख दंगों की याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसीलिए प्रियंका गांधी इसका रुख नोटबंदी और जीएसटी की ओर मोड़ना चाहती हैं।
वह चाहती हैं कि चुनाव का मुद्दा पांच साल के मोदी सरकार की कथित असफलताओं पर ही टिका रहे। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच भी समझौता नहीं हो पाया और कई बार गठबंधन के करीब आकर भी बात नहीं बनी। इसके बाद AAP, कांग्रेस और बीजेपी तीनों ही पार्टियों के कैंडिडेट सातों सीटों पर उतर चुके हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस और AAP में गठबंधन न होने से इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।
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