महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: क्या MVA बनेगा राज?

शिवसेना (UBT) नेता संजय राऊत ने शुक्रवार को दावा किया कि महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता “निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं” और गठबंधन भागीदारों के बीच सीट-बंटवारे की बातचीत में देरी पर अपनी निराशा व्यक्त की। राऊत ने आगे दावा किया कि महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन कुल 288 विधानसभा सीटों में से 200 पर सहमति पर पहुँच गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस के महासचिवों केसी वेणुगोपाल और मुकुल वासनिक से बात की। उन्होंने आगे दावा किया कि वह दिन में बाद में कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी से बात करेंगे।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारे की गतिरोध

कांग्रेस की निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल

संजय राऊत के बयान से साफ़ है कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे को लेकर MVA घटक दलों के बीच मतभेद गहरा रहे हैं। राऊत ने कांग्रेस नेताओं पर निर्णय लेने में असमर्थता का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें बार-बार दिल्ली को सूची भेजनी पड़ती है और फिर वहां चर्चा होती है। यह बात गठबंधन के भीतर विश्वास की कमी को दर्शाती है। सीट बंटवारे में देरी से गठबंधन की चुनावी तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है। चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं और अभी तक सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है, जिससे भविष्य को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। राऊत द्वारा राहुल गांधी से बात करने का दावा, इस संकट के निवारण के लिए एक अंतिम प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।

कांग्रेस का पक्ष और विवादित सीटें

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पाटोले ने दावा किया कि 20-25 विधानसभा क्षेत्रों की सूची, जहाँ MVA भागीदारों के दावे अतिव्यापी हैं, प्रत्येक पार्टी के उच्च कमांड को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि लगभग 25 विवादित सीटों की सूची MVA के प्रत्येक घटक के उच्च कमांड को भेजी जाएगी। उद्धव ठाकरे, शरद पवार और मल्लिकार्जुन खड़गे इन सीटों पर अंतिम निर्णय लेंगे। पाटोले का यह बयान विवादित सीटों के मुद्दे को स्वीकार करता है, हालाँकि, उन्होंने दावा किया कि तीनों दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है और एनडीए नेता अपने प्रचार के लिए अफवाहें फैला रहे हैं। लेकिन राऊत के बयान और सीटों की सूची के आदान-प्रदान से विपरीत स्थिति ज़ाहिर होती है।

अन्य दलों की माँगें और राजनीतिक समीकरण

समाजवादी पार्टी ने मुंबई सहित 12 सीटों की मांग की है, जिसमें बायकुला, मानखुर्द शिवाजी नगर, वर्सोवा और अनुशक्ति नगर जैसी चार प्रमुख सीटें शामिल हैं। यह मांग MVA के भीतर सीट बंटवारे की जटिलता को दर्शाता है। हर पार्टी अपनी ताकत के अनुसार सीटें हासिल करना चाहती है और इसमें समझौता करना उनके लिए आसान नहीं है। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी की यह मांग अन्य दलों को भी अपनी सीटों के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर कर सकती है, जिससे बातचीत और जटिल हो सकती है।

लोकसभा चुनावों का असर और आगामी चुनाव

MVA ने महाराष्ट्र में 48 में से 30 सीटों पर जीत दर्ज करके लोकसभा चुनावों में अपने प्रतिद्वंद्वी NDA को पछाड़ दिया था। इस जीत ने MVA के विधानसभा चुनावों में आत्मविश्वास बढ़ाया है। हालांकि, लोकसभा चुनावों में सफलता का मतलब यह नहीं है कि विधानसभा चुनाव भी उसी तरह आसानी से जीते जा सकेंगे। सीट बंटवारे जैसे मुद्दे गठबंधन की एकता को कमज़ोर कर सकते हैं। आगामी चुनाव में सीट बंटवारे का मामला MVA के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है, जिसके नतीजे उनकी चुनावी संभावनाओं पर असर डाल सकते हैं।

निष्कर्ष:

  • महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के लिए सीट-बंटवारे को लेकर MVA गठबंधन में गतिरोध बना हुआ है।
  • कांग्रेस नेताओं की निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठे हैं।
  • अन्य दलों की मांगें भी सीट बंटवारे को और जटिल बना रही हैं।
  • लोकसभा चुनावों की सफलता के बावजूद, सीट बंटवारा MVA के लिए एक बड़ी चुनौती है।
  • समय पर सीटों का बंटवारा न होना गठबंधन के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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