CITIZENSHIP AMENDMENT BILL LIVE: राज्यसभा में चर्चा जारी नागरिकता संशोधन विधेयक पर , DMK, CPI (M) ने किया विरोध, JDU का समर्थन

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नई दिल्ली। मोदी सरकार की असली परीक्षा आज नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को राज्यसभा में पारित कराना होगा। नागरिक संशोधन विधेयक को लेकर राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है। राज्यसभा में अमित शाह ने नागरिक संशोधन विधेयक रख दिया है। विपक्षी दलों ने इसे रोकने के लिए कमर कस ली है।

LIVE अपडेट..
– राज्यसभा में डीएमके, TRS और सीपीआई (एम) ने इस बिल के विरोध में वक्तव्य कर दिया है। सीपीआई (एम) नेता रंगराजन ने कहा कि श्रीलंका से जो तमिल माइग्रेंट आए वो 35 साल से नागरिकता के लिए भटक रहे हैं, लेकिन किसी ने उनके बारे में नहीं सोचा, जबकि AIADMK ने इस बिल का समर्थन कर दिया है।

  • जेडीयू सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि इस बिल को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है। इस बिल में संविधान का उल्लंघन नहीं हुआ है, ना ही आर्टिकल 14 का उल्लंघन हुआ है। जदयू ने राज्यसभा में इस बिल का समर्थन किया है, जदयू सांसद बोले कि हमारा देश रिपब्लिक है, यहां के नागरिकों को समान अधिकार है, हमारे देश में CJI, राष्ट्रपति भी अल्पसंख्यक समाज से हुए हैं लेकिन क्या पड़ोसी मुल्क में ऐसा हुआ क्या।

-राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि इस बिल पर संसद में संग्राम होगा लेकिन उसके बाद ये बिल सुप्रीम कोर्ट में भी जाएगा। उन्होंने इस दौरान कहा कि ये बिल भारत विरोधी, बंगाल विरोधी है।

  • भाजपा नेता जेपी नड्‌डा ने कहा है कि कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने राज्यसभा में अपनी तेज आवाज में बात रखी है लेकिन उनके बयानों में तख्यों की कमी है। कई तख्यों को उन्होंने राज्यसभा में नहीं रखा है।

-कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने कहा कि पहले और अब के बिल में काफी अंतर है, सबसे बात करने का जो दावा किया जा रहा है उससे मैं सहमत नहीं हूं। इतिहास इसको कैसे देखेगा, उसे वक्त बताएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बिल को लेकर जल्दबाजी क्यों हो रही है, संसदीय कमेटी के पास इसे भेजा जाता और तब लाया जाता। आनंद शर्मा ने कहा कि 72 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, ये विरोध के लायक ही है। ये बिल संवैधानिक, नैतिक आधार पर गलत है, ये बिल प्रस्तावना के खिलाफ है। ये बिल लोगों को बांटने वाला है, हिंदुस्तान की आजादी के बाद देश का बंटवारा हुआ था, तब संविधान सभा ने नागरिकता पर व्यापक चर्चा हुई थी। बंटवारे की पीड़ा पूरे देश को थी, जिन्होंने इसपर चर्चा की उन्हें इसके बारे में पता था।

आनंद शर्मा ने आगे कहा कि यह बिल संविधान निर्माताओं पर सवाल उठाता है, क्या उन्हें इसके बारे में समझ नहीं थी। भारत के संविधान में किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ, बंटवारे के बाद जो लोग यहां पर आए उन्हें सम्मान मिला है, पाकिस्तान से आए दो नेता प्रधानमंत्री भी बने है।टू नेशन थ्योरी कांग्रेस पार्टी ने नहीं दी थी, वो सावरकर ने हिंदू महासभा की बैठक में दी थी। आनंद शर्मा ने कहा कि गृह मंत्री ने बंटवारे का आरोप उन कांग्रेसी नेताओं पर लगाया जिन्होंने जेल में वक्त गुजारा, ये राजनीति बंद होनी चाहिए।

  • अमित शाह ने कहा है कि असम की समस्या का निदान किया जाएगा। मोदी सरकार में असम वासियों को अधिकार दिए हैं। किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए मुसलमान को।
    -केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बताया कि इस सदन के सामने एक ऐतिहासिक बिल लेकर आया हूं, इस बिल के जो प्रावधान हैं उससे लाखों-करोड़ों लोगों को फायदा होगा। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में जो अल्पसंख्यक रहते थे, उनके अधिकारों की सुरक्षा नहीं होती थी उन्हें वहां पर समानता का अधिकार नहीं मिला था, जो अल्पसंख्यक धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत में आए, उन्हें यहां पर सुविधा नहीं मिली। पाकिस्तान में पहले 20 फीसदी अल्पसंख्यक थे, लेकिन आज 3 फीसदी ही बचे हैं, इस बिल के जरिए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को रियातत मिलेगी।

  • राज्यसभा में कार्यवाही शुरू हो गई है।

-शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा है कि हमारी शंका दूर हो जाएगी तो हम बिल के समर्थन दे देंगे। किसी से भी राष्ट्रभक्ति सिखने की आवश्यकता नहीं है। लोकसभा में हालात और आंकडे अलग थे। सरकार ध्यान दें कि तमिल शरणार्थी भी हिन्दू हैं।

-नागरिकता संशोधन बिल पर राज्यसभा में घमासान से पहले संसद में भाजपा की संसदीय दल की बैठक हुई। मीडिया के अनुसार, बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिल का विरोध करने वाले विपक्षी सांसदों पर बड़ा हमला बोला। मोदी ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल पर कुछ नेता तो पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। बैठक में मोदी ने कहा कि बिल से लाखों-करोड़ों शरणार्थियों की जिंदगी में बदलाव आएगा।

–राज्यसभा में आज प्रश्नकाल नहीं होगा, नागरिकता संशोधन बिल पर दोपहर 12 बजे से ही बहस शुरू हो जाएगी।

-राज्यसभा में मोदी सरकार के लिए नागरिकता संशोधन बिल को पास कराने की राह आसान हो गई है। टीडीपी, YSR कांग्रेस इस बिल के समर्थन में रहेंगी, जबकि टीआरएस इस बिल का विरोध करेगी।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उच्च सदन में विधेयक के पारित कराने में विभिन्न पार्टियों के बीच संतुलन बैठाने के लिए शीर्ष नेता, गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अपनी भूमिका निभाएंगे।

भाजपा के एक महासचिव व एक अन्य राज्यसभा सदस्य का कहना है कि पार्टियों के बीच केमिस्ट्री बनाना ही राज्यसभा में विधेयक को पारित कराने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं। लेकिन अब कुछ खाली सीटों के साथ सदन की ताकत 238 है। भाजपा को विधेयक को पारित करने के लिए 120 वोटों की आवश्यकता है। उच्च सदन में भाजपा के 83 सांसद हैं और उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास कुल 94 सांसद हैं।

भाजपा के 83 सांसदों के अलावा, राजग में जनता दल (युनाइटेड) के छह सांसद, शिरोमणि अकाली दल के तीन और लोक जनशक्ति पार्टी व भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के एक-एक सांसद भी हैं। राज्यसभा में 12 मनोनीत सांसद हैं। भाजपा को 11 से समर्थन का भरोसा है, जिसमें सुब्रमण्यम स्वामी, स्वपन दासगुप्ता, राकेश सिन्हा भी शामिल हैं।

 

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अगर 11 और राज्यसभा सदस्यों को जोड़ लिया जाए तो राजग के सदस्यों की गिनती 105 तक पहुंच जाएगी, जहां उसे अभी भी 15 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। यहीं पर भाजपा की ‘केमिस्ट्री’ काम आ सकती है, जो नागरिकता संशोधन विधेयक के लिए एक सुगम मार्ग बना सकती है, ताकि पार्टी 120 के आंकड़े तक पहुंच सके।

राज्यसभा में देखें मोदी सरकार का आंकड़ा….

नागरिकता संशोधन विधेयक पर लोकसभा में जिन दलों ने समर्थन किया था। इस इसाब से इनकी संख्या 119 है। इनमें भाजपा के 83, बीजेडी के 7, एआइएडीएमके के 11, अकाली दल के 3,जेडीयू के 6 वाईएसआर कांग्रेस के 2, एलजेपी के 1, आरपीआई के 1 और 4 नामित राज्यसभा सदस्य हैं।

विपक्ष के पास 100 सदस्य…

नागरिकता संशोधन विधेयक पर विपक्ष का जिस तरह से रुख अपना रखा है। इस इसाब से राज्यसभा में इस विधेयक को रोकने में बहुत मजबूत स्थिति में नजर नहीं आ रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस के 46, टीएमसी के 13, सपा के 9, वामदल के 6 और डीएमके के 5 और आरजेडी, एनसीपी और बसपा के 4-4 सदस्य हैं। इसके अलावा टीडीपी के 2, मुस्लिम लीग के 1 पीडीपी के 2, जेडीएस के 1, केरल कांग्रेस के 1 और टीआरएस के 6 सदस्य हैं। इस प्रकार विपक्ष के पास 100 सदस्य होते हैं।

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