Kisan Andolan : कृषि कानून के खिलाफ सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा के किसानों ने आवाजें बुलंद की हैं। आज लगातार सातवें दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसानों का साफ कहना है कि जब तक केंद्र सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती, तब तक वो अपना आंदोलन जारी रखेंगे। सिंघु बॉर्डर पर हरियाणा और पंजाब से आए हजारों ट्रैक्टर और ट्रॉलियां खड़े हैं और हर बीतते दिन के साथ ये संख्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में इन कृषियों के खाने पीने की जिम्मेदारी कौन उठा रहा है। तब इस मामले की जांच की गई तो सामने आया कि किसान आंदोलन का बहीखाता है।
जी हं, हर गांव में साल में दो बार चंदा इकट्ठा किया जाता है। मिली जानकारी के मुताबिक, हर छह महीने में तकरीबन ढाई लाख रूपये तक चंदा इकट्ठा हो जाता है।इस आंदोलन को पंजाब के डेमोक्रेटिक टीचर्स फेडरेशन ने सबसे ज्यादा मदद की है। इस फेडरेशन की ओर से किसानों की सहायता के लिए दस लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की गई है।
इसके अलावा किसानों पर कहां कितना खर्च किया जा रहा है। इस बारे में सभी जानकारी बहीखाते में दर्ज की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन उगराहां से संबंधित करीब 1400 गांव साल में दो बार चंदा इकट्ठा करते हैं। एक चंदा गेहूं की कटाई के बाद इकट्ठा किया जाता है। जबकि दूसरा धान की फसल के बाद जुटाया जाता है। पंजाब के गांवों में हर छह महीने में करीब ढाई लाख रुपये इकट्ठे हो जाते हैं।
बताते चलें ट्रॉलियों में खाने-पीने का सामान लदा है और किसानों के रहने और सोने की व्यवस्था है। यहां दिन भर चूल्हे जलते रहते हैं और कुछ ना कुछ पकता रहता है। दिल्ली के कई गुरुद्वारों ने भी यहां लंगर लगाए हैं इसके अलावा दिल्ली के सिख परिवार भी यहां आकर लोगों को खाना खिला रहे हैं।
इस आंदोलन से जुड़ी यूनियनों ने चंदा इकट्ठा करने के लिए गांव से लेकर जिला स्तर तक पर समीतियां बनाई हैं और आ रहे पैसों का पूरा हिसाब रखा जा रहा है.राजिंदर सिंह कहते हैं, ष्हम एक-एक पैसे का हिसाब रख रहे हैं. जो लोग देखना चाहें वो यूनियन में आकर देख सकते हैं. सिर्फ पैसों का ही नहीं, यूनियन के नेता आंदोलन में आ रहे लोगों का भी हिसाब रख रहे हैं. एक थिएटर ग्रुप से जुड़े युवा भी आपस में चंदा करके आंदोलन में शामिल होने पहुँचे हैं।
इसी में शामिल एक युवा का कहना था, बहुत जाहिर सी बात है, जो पंजाब पूरे देश का पेट भर सकता है, वो खघ्ुद भूखा नहीं मरेगा. हम सब अपनी व्यवस्था करके आए हैं. गांव-गांव में किसान यूनियनों की समीतियां हैं, हम सबने चंदा इकट्ठा है. ट्रॉली में भले ही एक गांव से पांच लोग आए हों, लेकिन पैसा पूरे गांव ने इकट्ठा किया है. हम अपनी नेक कमाई से इस आंदोलन को चला रहे हैं.ष्शाम होते-होते पंजाब की ओर से आए कई नए वाहन प्रदर्शन में पहुंचे. इनमें से रोटियां बनाने की मशीनें उतर रही थीं।
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