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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : कुशीनगर मे गत दिनो जहां पत्रकार के पिता की हमलावरो ने हथियार से हमला कर मौत के घाट उतार दी थी ,वही पत्रकारिता जगत से जुडे लोग उनकी मौत के ठीक ठंग से अभी भूले ही नही थे की अगले दिन एपीएन न्यूज के पत्रकार दिवाकर राय की असमय मृत्यु ने सभी पत्रकारों को झकझोर कर रख दिया था। हालाकी दिवाकर राय तो संतोष गौड़ के पिता की गत दिनो हुई हत्या के बाद यहां के जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वाले पत्रकारों में अग्रणी भूमिका निभाते हुए अगले सुबह जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौपें थे। लेकिन दुर्भाग्य से ठीक उसी दिन शाम को 8:00 बजे एक दुर्घटना में उनकी मौत हो गई । उधर इस दोनो दुखद : घटना से पत्रकारीता जगत मे मायूसी छा गई थी,इससे ठीक इतर होकर जिले के ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन द्वारा पडरौना नगर के उदित नारायण इंटर कॉलेज में सम्मान समारोह में पत्रकारों को सम्मानित करने के दौरान मृतक पत्रकार दिवाकर राय के प्रति शोक संवेदना तक नही किया जाना अखर के रह गया ।
बताते चले की एक तरफ पत्रकार दिवाकर राय को चिता पर लिटा कर उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा था तो दूसरी ओर जनपद के पत्रकारों को पडरौना मे सम्मानित किया जा रहा था । समारोह के दौरान दिवाकर राय की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखना मुनासिब नही समझा जा सका | जबकी इस सम्मान समारोह मे कई एेसे पत्रकारो ने कार्यक्रम स्थल गए ही नही गए और ना ही इस कार्यक्रम को तरजीह दी वजह साफ थी पत्रकार दिवाकर राय की दुर्घटना मे हुई मौत को लेकर | सवाल पत्रकार की मौत को तरजीह ऩ देना कही ना कही बडा सवाल खडा कर रहा है l
ऐसे मे इस सम्मान समारोह को एक दो दिन के लिए टाला भी जा सकता था ? अहम बात तो यह भी रही की इस सम्मान समारोह में कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही हो या श्रम मंत्री सदर विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य बातौर मुख्य अतिथि की भूमिका में रहने के बावजूद पत्रकार दिवाकर राय की मौत के बाद कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके । भले ही दोनो मंत्री का प्रोट्रोकाल को लेकर कोई कुछ भी कहे इन्होने तो पत्रकार की मौत को लेकर पत्रकार सम्मेलन न जाकर एक मर्यादा रखने का काम किया है वह भी एक चर्चा बिषय है |
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