सनसनीखेज वारदात : वरिष्ठ BSP नेता और उनके कार चालक की सरेआम गोली मारकर हत्या

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अंबेडकरनगर. जिले में बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता ज़ुरगाम मेहंदी और उनके कार चालक सुनीत यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई. डबल मर्डर की ये सनसनीखेज वारदात अंबेडकरनगर के हंसवार थाना क्षेत्र की है. जहां नसीराबाद में रहने वाले बसपा के वरिष्ठ नेता ज़ुरगाम मेहंदी सोमवार की सुबह अपनी कार में टांडा की तरफ जा रहे थे. गाड़ी उनका ड्राइवर सुनीत यादव चला रहा था. . सरेआम अज्ञात लोगों ने गोलियों से छलनी कर दिया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। गोली लगने से दो राहगीर भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। एसपी ने टीम के साथ घटनास्थल का मुआयना कर जांच शुरू कर दी है। जुगराम मेहंदी बसपा के पूर्व मंत्री लालजी वर्मा के बेहद करीबी थी। 

हंसवार थाना क्षेत्र के नसीराबाद निवासी बसपा नेता जुगराम यादव सोमवार सुबह अपनी जीप में सवार होकर गांव से टांडा शहर जा रहे थे। गाड़ी उनका चालक सुनीत यादव चला रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 9:30 बजे के करीब गाड़ी जब रामपुर स्थलवा के पास पहुंची तभी दो बाइकों पर सवार 6 अज्ञात लोगों ने दोनों तरफ से उन्हें घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर शुरू दी।

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वरिष्ठ BSP नेता और उनके कार चालक की सरेआम गोली मारकर हत्या

करीब छह राउंड फायरिंग में जुगराम और चालक सुनीत को सीने समेत शरीर में कई जगह गोलियां लगीं। इस दौरान उधर से गुजर रहे दो राहगीरों को भी गोलियां लगीं। सरेआम हुई इस घटना से भगदड़ मच गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को अस्पताल पहुंचाया। यहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बसपा नेता और उनके चालक को मृत घोषित कर दिया।

सूत्रों के मुताबिक माफिया खान मुबारक से जुगराम की पुरानी रंजिश चली आ रही थी। एक साल पहले भी उसने हमला करवाया था। आशंका जताई जा रही है कि खान मुबारक ने ही हत्या करवाई है।

बसपा नेता जुगराम पर इससे पहले भी दो बार जानलेवा हमला हो चुका था। एक बार वे बाल-बाल बच गए जबकि एक बार 9 गोलियां लगने के बाद भी उन्होंने मौत को मात दी। लेकिन, सोमवार को हुए हमले में वे जिंदगी की जंग हार गए। वहीं, जुगराम के खिलाफ कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। हंसवर थाने में 11 मुकदमे जबकि एक मुकदमा मुंबई में दर्ज है।

इस घटना पर बसपा नेता पूर्व मंत्री लालजी वर्मा ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जुगराम की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया होता तो यह नौबत न आती। पहले भी उन पर हमले हुए थे, जिसके मद्देनजर प्रशासन को उन्हें सुरक्षा मुहैया करानी थी।

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