इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत का माह हैं मोहर्रम:सैय्यद इक़बाल हैदर

इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत का माह हैं मोहर्रम:सैय्यद इक़बाल हैदर

रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

अमेठी। मोहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख माह है इस माह की उनके लिए बहुत विशेषता और महत्व है इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम हिजरी संवत का प्रथम मास है मोहर्रम इस्लामी साल का पहला महीना होता है इसे हिजरी भी कहा जाता है हिजरी सन की शुरुआत इसी महीने से होती है इतना ही नहीं इस्लाम के 4 पवित्र महीनों में इस महीने को भी शामिल किया जाता है अल्लाह के रसूल हजरत मोहम्मद सल्लल्लाह ने इस मास को अल्लाह का महीना कहा है मोहर्रम के बारे में सैय्यद इक़बाल हैदर के अनुसार जानने से पता चलता है कि इराक में यजीद नामक जालिम बदमाश था जो इंसानियत का दुश्मन था हजरत इमाम हुसैन ने जालिम बदमाश यजीद के विरुद्ध जंग का ऐलान कर दिया था मोहम्मद ए मुस्तफा के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला नामक स्थान में परिवार व दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था जिस महीने में हुसैन और उनके परिवार को शहीद किया गया था वह मुहर्रम का ही महीना 10 तारीख थी जिसके बाद इस्लाम धर्म के लोगों ने इस्लामी कैलेंडर का नया साल मनाना छोड़ दिया बाद में मोहर्रम का महीना गम और दुख के महीने में बदल गया। इस्लाम की तारीख में पूरी दुनिया के मुसलमानों का प्रमुख नेता यानी खलीफा चुनने का रिवाज है ऐसे में पैगंबर मोहम्मद साहब के बाद चार खलीफा चुने गए लोग आपस में तय करके योग्य व्यक्ति को प्रशासन सुरक्षा इतिहास के लिए खलीफा चुनते हैं।जिन लोगों ने हजरत अली को अपना इमाम (धर्मगुरु) और खलीफा चुना वे शियाने अली यानी शिया कहलाते हैं सिया यानी हजरत अली के समर्थक। इसके विपरीत सुन्नी वे लोग हैं जो चारों खलीफाओं के चुनाव को सही मानते हैं मोहर्रम माह के दौरान शिया समुदाय के लोग मोहर्रम के 10 दिन काले कपड़े पहनते हैं वहीं अगर बात करें तो मुस्लिम समाज के सुन्नी समुदाय के लोगों मोहर्रम के 10 दिन तक रोजा रखते हैं इस दौरान इमाम हुसैन के साथ जो लोग कर्बला में शहीद हुए थे उन्हें याद किया जाता है और उनकी आत्मा की शांति की दुआ की जाती है

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