बिहार-उत्तरप्रदेश की सीमा पर बसा गहमर गाँव करीब आठ वर्गमील में फैला है। और विश्व का सबसे बड़ा गांव है। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले का गहमर गांव फौजियों के गांव के रूप में भी जाना जाता है। साल 1530 बसा इस गांव की पॉपुलेशन करीब डेढ़ लाख है।युवकों को सेना में भर्ती के लिए भूतपूर्व सैनिकों का सहयोग मिलता है। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले का गहमर गाँव न सिर्फ एशिया के सबसे बड़े गाँवों में गिना जाता है, बल्कि इसकी ख्याति फौजियों के गाँव के रूप में भी है। यहाँ के लोग फौजियों की जिंदगी से इस कदर जुड़े हैं कि चाहे युद्ध हो या कोई प्राकृतिक विपदा यहाँ की महिलायें अपने घर के पुरूषों को उसमें जाने से नहीं रोकती, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित कर भेजती हैं।

इस गाँव के करीब दस हजार फौजी इस समय भारतीय सेना में जवान से लेकर कर्नल तक विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं, जबकि पाँच हजार से अधिक भूतपूर्व सैनिक हैं। यहाँ के हर परिवार का कोई न कोई सदस्य भारतीय सेना में कार्यरत है।
प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध हों या 1965 और 1971 के युद्ध या फिर कारगिल की लड़ाई, सब में यहाँ के फौजियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। विश्वयुद्ध के समय में अँग्रेजों की फौज में गहमर के 228 सैनिक शामिल थे, जिनमें 21 मारे गए थे. इनकी याद में गहमर मध्य विधालय के मुख्य द्वार पर एक शिलालेख लगा हुआ है।

आप को बता दें की गहमर गांव में शहर जैसी सारी सुविधाएं हैं। गांव में टेलीफोन एक्सचेंज, डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र हैं। गहमर 22 पट्टियों यानी टोलों में बंटा हुआ है। ऐतिहासिक दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 1530 में सकरा डीह नामक स्थान पर कुसुम देव राव ने गहमर गांव बसाया था। प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर भी गहमर में ही है, जो पूर्वी यूपी व बिहार के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केन्द्र है।

गांववालों का कहना है कि मां कामाख्या उनकी कुलदेवी हैं, जबकि देश सेवा उनका सबसे बड़ा फर्ज। इसीलिए गांव का हर युवा होश संभालते ही सेना में भर्ती के लिए दौड़ना शुरू कर देता है। पूरे गांव को अपने इस जज्बे को पर गर्व है। आपको जानकर हैरानी होगी की गहमर गांव के 12 हजार फौजी भारतीय सेना में जवान से कर्नल तक पदों पर हैं।
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