उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष व वरिष्ठ समाजसेवी मनोज मोदनवाल ने मुख्यमंत्री को शिकायती प्रार्थना पत्र भेजा है, जिसमें जिक्र किया है कि बिशनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही में गत 26 अप्रैल को स्कूली वैन हादसे के बाद शिक्षा विभाग अपनी नींद से जाग चुका है और बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों को चिन्हित कर बंद करने के आदेशों को कड़ाई से पालन कराने में लगा हुआ है, लेकिन मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर कोई अंकुश नहीं लगा रहा है जहां शिक्षा के नाम पर लूट मची हुई है, ऐसे में गरीब परिवार जो अपने बच्चों को छोटे-छोटे विद्यालयों में कम पैसे में शिक्षित करने में लगे हुए हैं वह बच्चे अब कहां जाएंगे एक बहुत बड़ा सवाल बन चुका है।
शिक्षा के नाम पर लूट
श्री मोदनवाल ने सीएम को भेजे पत्र मे कहा है कि पिछले दिनों कुशीनगर जिले के बिशुनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही में बिना मान्यता प्राप्त विद्यालय की एक वैन व ट्रेन में टक्कर होने के बाद 13 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी और लगभग आधे दर्जन घायल हो गए। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग अपने कुंभकर्णी नींद से जागा और बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों को बंद कराने में लगा हुआ है। उन्हें चिन्हित करके नोटिस जारी किया जा रहा है। ऐसे में इन विद्यालयों के बंद होने के बाद यहाँ पढ़ने वाले बच्चे अब कहां जाएंगे बहुत बड़ा सवाल बन चुका है। वहीं शिक्षा विभाग मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर कोई अंकुश नहीं लगा पाया और यह मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षा के नाम पर लूट मचाए हुए हैं।
दिशा-निर्देश जारी किया गया
कमीशनखोरी की किताबें यहां चलाई जा रही हैं, जूते-मोजे, ड्रेस सब कुछ इनके वहां बिकते हैं ऐसे में गरीब परिवार जो अपने बच्चों को कम पैसे में छोटे-छोटे खुले विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कराने के सपने को साकार करने के लिए नामांकन कराए थे। इन विद्यालयों के बंद होने के बाद कहां जाएंगे,शिक्षा विभाग की मानें तो बिना मान्यता के संचालित विद्यालयों के बंद होने पर यहां के बच्चों को सरकारी विद्यालयों में या फिर मान्यता प्राप्त विद्यालयों में नामांकन कराने का दिशा-निर्देश जारी किया गया है।
लेकिन दूसरी तरफ देखे तो शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालय खुद ही शिक्षा के नाम पर बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं तो दूसरी तरफ मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षा के नाम पर लूट मचाए हुए हैं ऐसे में एक गरीब परिवार अपने बच्चों को कहां शिक्षा दे यह एक बहुत बड़ा सवाल है, ऐसे में या तो गरीब परिवार शिक्षा माफियाओं के हाथों लूटने को तैयार हो जाए या फिर बच्चों को शिक्षा से ही वंचित कर दे।
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