सिवनी। कोरोना संक्रमण का असर धार्मिक आयोजनों पर भी पड़ने लगा है। सिवनी शहर के सिद्धपीठ प्राचीन मठ मंदिर में 26 साल से पूरे सावन माह अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया जाता था। 27 वें साल कोरोना महामारी ने इस पर विराम लगा दिया है। मंदिर की महाकाल समिति ने संक्रमण को देखते हुए इस साल मंदिर परिसर में अखंड रामायण पाठ का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया है। वर्ष 1994 में ऐसे हुई थी शुरुआत सिद्धपीठ मठ मंदिर में 26 साल पहले वर्ष 1994 में अखंड रामायण पाठ की शुरआत हुई थी।
महाकाल समिति ने सावन माह में सिर्फ एक दिन के लिए अखंड रामायण पाठ मंदिर में कराए जाने का निर्णय लिया था। एक दिन अच्छे से अखंड रामायण का आयोजन होने पर इसे दो दिन का कर दिया गया। धीरे धीरे दिन बढ़ते गए और पूरे सावन माह अखंड रामायण पाठ का आयोजन हो गया। इसके बाद हर साल पूरे सावन माह अखंड रामायण पाठ कराए जाने का निर्णय महाकाल समिति के सदस्यों ने लिया था। 26 साल से लगातार सावन माह में अखंड रामायण पाठ का आयोजन निर्विघ्न हो रहा था।
सजाया जाता था राम दरबार
मठ मंदिर परिसर में सावन माह के पहले दिन से श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान की प्रतिमा स्थापित की जाती थी। राम दरबार के सामने कतार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बैठकर अखंड रामायण पाठ करते थे। इस साल राम दरबार भी नहीं सजाया गया है। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया है कि सावन माह में मुख्यालय सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजनपाठ व रामायण पाठ करने पहुंचते हैं। भारी भीड़ होने के कारण इस बार अखंड रामायण पाठ न कराए जाने का निर्णय कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए लिया गया है।
पं. राघवेंद्र शास्त्री ज्योतिषषाचार्य ने बताया कि सावन माह में अखंड रामायण पाठ का बहुत महत्व है। इस माह रामायण पाठ करने या सुनने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही दुख व दरिद्रता दूर होती है। सभी को सावन माह में भगवान भोलेनाथ की पूजा, अभिषषेक के साथ रामायण पाठ करना चाहिए।
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