तमाम दावों के बाद भी जिला चिकित्सालय सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधा का अभाव

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जांजगीर. वर्तमान कोरोना संकट काल में शासन-प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं ,परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

यह स्थिति तब है जब शासन द्वारा अलग-अलग स्तर पर सुविधा उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं । यह भी कि इस हेतु जिला प्रशासन को अलग-अलग संस्थानों द्वारा राशि और स्वास्थ्य सम्बन्धी उपकरण दवाइयां जनसहयोग से दी जा रही हैं ।

जिले के पामगढ़ और माल खरौदा जैसे जगहों पर जनसहयोग से ही कोविड-19 सेंटर भी शुरू हो रहे हैं ।शासन द्वारा की जा रही व्यवस्था के बाद भी ज्यादा अच्छे परिणाम और कसावट लाने के लिए जन सहयोग लेना पढ़ रहा है।

शासन और दान में प्राप्त राशि के बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा। एम्बुलेंस तक के लिए लोगों को निजी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिसके लिए बड़ी राशि खर्च करना पड़ता है। गम्भीर मरीजों को ले जाने के लिए एम्बुलेंस मिलना मुश्किल होता है। एम्बुलेंस संचालकों के द्वारा सम्बंधित अस्पताल की पर्ची और अन्य औपचारिकता के बाद ही सुविधा देने की बात की जाती है। किसी व्यक्ति की स्थिति अचानक गम्भीर हो जाये तो ,तो एम्बुलेंस के बिना अस्पताल तक जाना प्राण-घातक हो सकता है।
दवाइयों के मामले पर भी यही हाल है। अकलतरा-बलौदा के स्वास्थ्य केंद्र दवाइयों के लिए दान-दाताओं पर निर्भर है।

ऐसे में यह प्रश्न स्वभाविक ही खड़ा होता है कि जन सहयोग से प्राप्त राशि और अन्य सामग्रियों का उपयोग कहां और किस स्तर पर किया जा रहा है । यह प्रश्न इसलिए भी खड़ा होता है कि गत वर्ष गांव -गांव में बनाए गए क्वॉरेंटाइन सेंटर में आर्थिक अनियमितता की शिकायत साल भर चर्चा में बनी रही। ऐसी परिस्थितियां जन सामान्य में भ्रम पैदा करती है । इसलिए यह आवश्यक है की प्रशासन को प्राप्त होने वाले दान एवं किए जाने वाले खर्चों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।

इस संबंध में भाजपा नेता प्रशांत सिंह ठाकुर ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि
” जिला मुख्यालय जांजगीर सहित जिले के अन्य स्थानों में कोरोना संबंधी व्यवस्था बनाने के लिए व्यक्ति या संस्थाओं के द्वारा किए गए दान और तत्सम्बन्धी व्यय की जानकारी सार्वजनिक की जाए । उन्होंने यथाशीघ्र जिला चिकित्सालय में सीटी स्कैन मशीन प्रारम्भ करने , वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाने के साथ एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाए जाने की मांग की है।

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