नई दिल्ली: देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का नेतृत्व सत्ता जाने के बाद से वापसी के लिए खासी बेचैन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में कांग्रेस सत्ता में नहीं है. हिमाचल प्रदेश की सत्ता गंवाने के बावजूद उसे गुजरात में कुछ सफलता मिली, लेकिन वह भी सत्ता तक नहीं. सत्ता में वापसी को बेचैन कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी को तोड़ निकाल लिया है.
कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मान लिया है कि वह 2019 लोकसभा चुनाव में अकेले दम पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के मजबूत संगठन का मुकाबला नहीं कर सकती है. लिहाजा सोनिया गांधी ने समान विचार वाले दलों के साथ गठबंधन पर विचार करने की बात कही है, ताकि संयुक्त विपक्ष के दम पर सत्ता में वापसी का रास्ता तैयार किया जा सके. इसे विचार में पूर्व में अपनाए गए बिहार फार्मूले को माना जा रहा है.
दिल्ली में सीपीपी मीटिंग में सोनिया ने कहा कि गुजरात विधानसभा और राजस्थान उपचुनाव में पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया है. ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष (राहुल गांधी) और समान विचार वाले दलों के साथ जुड़कर काम करने के लिए भाजपा को 2019 में हराने के लिए तैयार हूं. इससे भारत फिर लोकतांत्रिक, समावेशी, धर्मनिरपेक्ष, सहिष्णु और आर्थिक रूप से प्रगति के पथ पर वापस लौट आएगा. यही नहीं सोनिया ने आगे कहा कि गुजरात और राजस्थान में पार्टी के प्रदर्शन से साफ है कि देश में बदलाव की हवा चल निकली है, इसलिए सभी कार्यकर्ता 2019 की तैयारी शुरू कर दें.
गौरतलब है कि कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए 80 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं हाल ही में राजस्थान में विधानसभा की तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में पार्टी ने भाजपा को हराया है. 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस को भाजपा ने बुरी तरह हराया था. कांग्रेस महज 44 सीटों पर ही सिमट कर रह गई थी. वहीं भाजपा ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और नरेंद्र मोदी के करिशमे के चलते कुल 283 सीटें हासिल की थीं.
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