अक्षय कुमार के Fan है तो एक बार जरूर देखें… Bachchan Pandey Review

Review by :- RJ Abhinandan

I Film I Hero, भौकाल बनाए रखने के लिए भय बना के रखना बहुत जरूरी है… , हम मारते थे, मज़ा आता था, और मारते थे, और मज़ा आता था…, लोग मुझे भाई नही Godfather बोलते है… ऐसे ही कई जोरदार Dialogue से भारी है अक्षय कुमार की फिल्म “बच्चन पांडेय”।

कहानी :-

कहानी शुरू होती है Kriti sanon से, जो एक फ़िल्म बनाना चाहती है और एक अच्छे कहानी की तलाश में है। कुछ Research के बाद kriti को एक Villain की कहानी मिलती है, जिसे किसी को भी मारने में बहुत मज़ा आता है… जिसके ख़ौफ से लोग बहुत डरते है और उसे “बच्चन पांडेय” के नाम से जानते है।
Kriti को “बच्चन पांडेय” के बारे में सुन कर अच्छा लगता है, और वो decide करतीं है कि अब वो “बच्चन पांडेय” पर फ़िल्म बनाएंगी। Film बनाने kriti बच्चन पांडेय के गाँव UP जाती है, जहाँ बच्चन पांडेय के नाम से लोग डरते है। वहां kriti को अरशद वारसी मिलते है, जो बार बार kriti को समझते है कि बच्चन पांडेय पर film ना बनाये वरना बच्चन पांडेय हम दोनों को मार देगा। 
क्या Kriti बच्चन पांडेय पर फ़िल्म बना पाती है ?? क्या बच्चन पांडेय खुद पर फ़िल्म बनाने को राजी हो जाता है ?? या बच्चन पांडेय को पता चलने पर वो दोनों को मार देता है ?? या फ़िल्म बनने के साथ बच्चन पांडेय को kriti से प्यार हो जाता है ?? ये सब आपको फ़िल्म खत्म होते पता चल जायेग। 

Actor Performance :-

एक Gangster के किरदार में “अक्षय कुमार” बवाल लगते है। जब भी पर्दे पे आते है, Audience उनके Dialogue सुन कर सिटी और ताली बजाने को मजबूर होती है। कुल मिला कर ये कह सकते है कि “अक्षय कुमार” ही फ़िल्म की जान है। एक Director के किरदार में Kriti Sanon ने अच्छा काम किया है। “अक्षय कुमार” और kriti जितनी बार एक Frame में साथ दिखते है, Film की जान बनी रहती है। Audience को उनकी जोड़ी अच्छी लगती है। फ़िल्म में kriti के Acting में Variation दिखता है। कई बार वो हस्ती हैं, कई बार वो रोती है, कुछ Scene में उनकी आंखों में बच्चन पांडेय के लिए प्यार भी दिखता है। Jacqueline Fernandez का किरदार काफी छोटा रखा गया है। Jacqueline के किरदार को 2nd Half में Introduce किया जाता है। हालांकि बमुश्किल से अपने 5min के स्क्रीन टाइम में Jacqueline अपनी खूबसूरती से Audience के दिल मे अपनी जगह बना पाती है। बाकी कलाकारों की बात करे तो :- Arshad Warsi ने बढ़िया काम किया है, उनके कुछ Dialogue आपको अच्छे लगेंगे। Saharsh Kumar ने भी अच्छा काम किया है। Saharsh के काम मे बारीकी नज़र आती है। Saharsh को आपने इससे पहले Sushant Singh Rajput की फ़िल्म Chichore में देखा होगा। Abhimanyu Singh का काम शानदार है। Abhimanyu को स्क्रीन टाइम अच्छा दिया गया है। Akshay Kumar के साथ हाल ही आपने Abhimanyu Singh को फ़िल्म Sooryavnshi में देखा होगा, जिसमे वो एक Vilian की भूमिका में थे। Sanjay Mishra का काम बहुत मजेदार है। उनका किरदार काफी छोटा रखा गया है। लेकिन जितनी बार भी वो पर्दे पर आते है, Audience को हँसा कर जाते है। Pratik Babbar का किरदार भी काफी कम समय का है। Pratik को आपने इससे पहले फ़िल्म Baaghi 2 में देखा होगा। Pankaj Tripathi एक Acting Teacher की भूमिका में है। जिनका किरदार भी काफी छोटा रखा गया है, हालांकि उनके कुछ Dialogue Audience को हँसाते जरूर है। बाकी फ़िल्म में और भी छोटे किरदार है, जिन्होंने अपना काम बख़ूबी किया है।

Direction & Camera Work :- 

Farhad Samji ने इस फ़िल्म को Direct किया है। जो कि एक Professional Comedy Dialogue Writer है। हालांकि Industry में वो कई बार Writer और Director दोनों की भूमिका में दिखते है। बतौर Writer फरहाद ने अक्षय कुमार की फ़िल्म Laxmii, शाहरूख खान की फ़िल्म Dilwale, वरुण धवन की फ़िल्म Coolie No 1 सहित कई सारी फिल्मों की कहानी को लिखा है। बतौर Director फरहाद ने फ़िल्म Housefull 3 , Housefull 4 सहित कुछ एक फिल्मों को direct किया है। 
बात बच्चन पांडेय की करे तो कई बार फरहाद का डायरेक्शन कमजोर लगता है। कुछ scene को एडिट किया जा सकता था। Comedy Scene कई बार जोर जबरदस्ती के लगते है। 
Camera Work कुछ बहुत ज्यादा बेहतर नही है, जिसका जिक्र किया जाए। 

Song & Background Score :-

 
फ़िल्म का Background Score भौकाल मचाने वाला है, सुन कर एक अलग ही जोश आता है। कई Scene में Audience सिनेमा Hall में चिल्लाने को उत्साहित हो जाती है।
गाने की बात करे तो B Praak की आवाज़ में एक गाना जिसे अक्षय कुमार और kriti Sanon पर फिल्माया गया है, Audience के दिल को छू जाता है।

क्यों देखें ये फ़िल्म ?

अक्षय कुमार के fan है तो एक बार ये फ़िल्म देख सकते है। kriti Sanon की बाकी फिल्मों से, ये फ़िल्म उनके लिए थोड़ी अलग थी, जिसे आपको देखना चाहिए। 
आखिर में बस यही कहेंगे, Farhad Samji के जगह कोई और Director होता तो शायद फ़िल्म थोड़ी अलग और अच्छी बनती? आप की क्या राय है ???

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