राम मंदिर निर्माण को लेकर ‘अयोध्या कूच’, मुश्किल में प्रशासन, खुफिया एजेंसियां अलर्ट, जानिये आगे का कार्यक्रम

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अयोध्या। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद (एएचपी) द्वारा राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर 21 तारीख को लखनऊ से अयोध्या कूच का पूर्वनियोजित कार्यक्रम फैजाबाद जिला प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गया है। प्रदेशभर से खुफिया एजेंसियों के माध्यम से एएचपी कार्यकर्ताओं से संपर्क करके संख्या बल का लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ से तो यात्रा का शुभारंभ होगा लेकिन फैजाबाद की सीमा से अयोध्या अंदर आने की अनुमति संख्या बल देखने के बाद ही दी जाएगी, वह भी कार्यक्रम बाहर खुले मैदान में न हो और सामूहिक अनशन न करने की शर्त पर। जिले में धारा 144 और अलग-अलग दिनों में मूर्ति विसर्जन के कार्यक्रम की बात को भी प्रशासन अपनी ढाल बना रहा है। सूत्रों की मानें तो शासन स्तर पर साफ तौर पर सख्त हिदायत दी गई है कि अयोध्या से ऐसी कोई घटना ना हो, जिससे तोगड़िया के साथ मिलीभगत का कोई आरोप लगे।

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राम मंदिर निर्माण

एएचपी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री जितेंद्र शास्त्री ने अपने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया, 21 तारीख को लखनऊ से अयोध्या कूच का कार्यक्रम तय है। 22 तारीख की सुबह सभी राम भक्त अयोध्या पहुंच जाएंगे। 22 तारीख को अयोध्या में एचपी के चीफ के साथ सामूहिक रूप से 24 घंटे का अनशन सरयू तट पर चलेगा। 23 तारीख को संतों के मार्गदर्शन में सरयू तट पर संकल्प सभा होगी और राम मंदिर के लिए सरकार कानून बनाएं. इसकी मांग की जाएगी।

उन्होंने देशभर से लाखों कार्यकर्ताओं के पहुंचने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि अयोध्या के संतों के साथ साथ हरिद्वार, ऋषिकेश, नैमिषारण्य, चित्रकूट और काशी सहित भारत के विभिन्न क्षेत्रों से संतों की संख्या मौजूद रहेगी। साथ ही यह भी कहा कि प्रशासन को 10 तारीख से ही अनुमति के लिए आवेदन पत्र दिया गया है लेकिन अभी तक अनुमति नहीं दी गई है।

संगठन मंत्री का कहना है, सरकार अभी तक कार्यक्रम की इजाजत ना देकर हिंदू समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अयोध्या सब की है और सबको मंदिर के दर्शन करने का अधिकार है। एएचपी के जगद्गुरु राघवाचार्य ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकार को अध्यादेश लाने या कोर्ट से अतिशीघ्र फैसला हो इस दबाव बनाने के लिए अयोध्या कूच का आयोजन किया गया है।

अयोध्या सीओ आर के साव ने बताया कि अभी तक एएचपी के संगठन की तरफ से अनुमति का कोई भी कागज नहीं आया है। अनुमति मांगी जाएगी तो विचार किया जाएगा। फिलहाल जिले में धारा 144 व 24 तारीख तक मूर्ति विसर्जन के कार्यक्रम निर्धारित है।

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