टेकुआटार। अमवा धाम के शिव मंदिर में पिछले 44 वर्षों से अखंड कीर्तन चल रहा है। लोगों की आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर वर्ष 1985 में यहां हुए यज्ञ में गोरखनाथ मंदिर से महंत अवेद्यनाथ भी आए थे। इसकेअलावा समय-समय पर कई अन्य प्रमुख संतों का भी आगमन हो चुका है। रामकोला-कसया मार्ग पर स्थित अमवाधाम शिव मंदिर की क्षेत्र में बहुत लोकप्रियता है। मंदिर के महंत शिवराम दास (फलाहारी बाबा) बताते हैं कि यहां जमीन से निकले शिवलिंग की पूजा होती है।
आसपास के लोग इन्हें बऊरहवा बाबा के नाम से पूजते हैं। महंत के अनुसार अमवा गांव का यह इलाका जंगल था। स्थानीय लोगों ने गाय-भैंस चराते समय जमीन से निकले शिवलिंग को देखा और साफ-सफाई करके पूजा पाठ करने लगे। तीन जुलाई वर्ष 1969 को यहां मंदिर की स्थापना की गई। इसके बाद 27 सितंबर 1973 को अखंड सीताराम कीर्तन प्रारंभ हुआ। कीर्तन के 12 वर्ष पूर्ण होने पर जनवरी 1985 में विशाल यज्ञ का आयोजन हुआ जिसमें करपात्री महराज और महंत अवेद्यनाथ समेत कई प्रमुख संत आए थे।
पुजारी जयराम दास की देखरेख में सुबह-शाम भंडारा का भी आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि यहां लगातार 51 वर्ष तक अखंड कीर्तन कराने का संकल्प लिया गया है।शुरुआत से लेकर अब तक आसपास के गांवों के लोग ही कीर्तन करते हैं। मंदिर के साधु व सेवकों के अलावा आसपास के गांवों के लोग अपनी सुविधा व समय के अनुसार यहां बैठकर सीताराम संकीर्तन करते रहते हैं। तमाम लोग आस्था व मन्नत पूर्ण होने पर भी इस कीर्तन में भाग लेते रहते हैं।
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