लखनऊ, लखनऊ में एक से बढ़कर प्रतिभाएं हैं, खासकर नृत्य विधा में। जब बात कथक की हो तो लखनऊ में हुनर की कोई कमी नहीं। आज मिलिए शहर की ऐसी ही नृत्यांगना से, जो नृत्य के अजब-गजब रिकॉर्ड बना चुकी हैं। कभी वो सिर पर मटकी रखकर नृत्य करती हैं तो कभी परात की धार पर घंटों थिरकती हैं। ये हैं चेतना तिवारी। चेतना जागरूकता संदेश संग नृत्य प्रस्तुति के लिए पहचानी जाती हैं। चेतना ने देश भक्ति गीतों पर सिर पर मटकी रखकर आठ घंटे पांच मिनट नृत्य का वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया था। चेतना एक बार फिर वल्र्ड रिकॉर्ड के लिए मंच पर उतरी थीं। इस बार नृत्य के जरिए पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ चेतना ने मतदाताओं को जागरूक करने का काम भी किया था। चेतना ने करीब 70 देशभक्ति गानों पर 15 घंटे परात की धार पर नृत्य कर शहीदों को नमन किया था। चेतना अब तक विभिन्न मंचों पर एक हजार से ज्यादा प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।
चेतना का ख्वाब इससे भी और ज्यादा करने का है। वह कहती भी हैं कि मैं एक ऐसा वल्र्ड रिकॉर्ड बनाना चाहतीं, जिससे अपने लखनऊ के नाम को विश्व प्रसिद्ध कर सकूं। हर कोई कहे कि लखनऊ की लड़की ने कमाल कर दिया। हमारा लखनऊ अपने नृत्य घराने के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है। मैं इसकी प्रसिद्धि में और वृद्धि करना चाहती हूं।
चेतना चार साल की उम्र से नृत्य सीख रही हैं। चेतना ने कथक का प्रशिक्षण भी लिया है। साथ ही लखवनी कथक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत भी किया है। चेतना को नेपालगंज में 51 दीपक सिर पर रखकर कथक प्रस्तुति के लिए आज भी सराहना मिलती है। तब चेतना को सम्मान और पुरस्कार के तौर पर धनराशि भी मिली थी।
प्रतिभा की सराहना
चेतना ने शुरुआत में मनजीत कौर और उसके बाद कथक गुरु मनीषा मिश्रा से तीन साल नृत्य की तालीम ली। कोरियोग्राफर सरोज खान ने चेतना के नृत्य की तारीख कर 101 रुपये भी दिया था। कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा और धर्मेश भी चेतना काे सम्मानित कर चुके हैं। वहीं, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य भी चेतना के नृत्य कौशल की सराहना कर चुके हैं। इसके अलावा भी चेतना को विभिन्न सम्मान और पुरस्कार मिले हैं।
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