जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान को लेकर किया बैठक, दिए आवश्यक निर्देश

जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान को लेकर किया बैठक, दिए आवश्यक निर्देश
जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान को लेकर किया बैठक, दिए आवश्यक निर्देश

रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान 10 से 19 अगस्त तक चलाया जाएगा।

कृमि निवारण दिवस पर सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों व घर-घर जाकर बच्चों व किशोरों को दी जाएगी दवा।

अमेठी। बच्चों में बढ़ते कुपोषण की रोकथाम, शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से 10 अगस्त से 19 अगस्त तक राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान चलाया जाएगा। अभियान को लेकर जिलाधिकारी श्री अरुण कुमार ने आज स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक कर अभियान को सफल बनाने हेतु आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा अभियान के तहत 1 से लेकर 19 वर्ष तक के बच्चों व किशोरों को आंगनबाड़ी केंद्रों व घर-घर जाकर पेट के कीड़े मारने की दवा एल्बेन्डाजाल गोली निशुल्क खिलाई जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आर.एम. श्रीवास्तव ने बताया कि शासन द्वारा जनपद अमेठी में 575900 बच्चों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके सापेक्ष 670000 एल्बेंडाजोल की गोलियां प्राप्त हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि 1 से 2 वर्ष तक के बच्चे को ऐल्बेण्डाजोल 400 एमजी की आधी गोली एवं 3 से 19 साल के बच्चे को 1 गोली चबाकर खाने को दी जाएगी। जो बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं उन्हें भी आंगनबाड़ी केन्द्रों के मार्फत दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि यह अभियान साल में दो बार चलाया जाएगा। अभियान में शिक्षा विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने बताया कि यह दवा पूर्णतया सुरक्षित है। जो बच्चे स्वस्थ दिखें उन्हें भी ये खिलाई जानी है क्योंकि कृमि संक्रमण का प्रभाव कई बार बहुत वर्षों बाद स्पष्ट दिखाई देता है। दवा से पेट के कीड़े मरते हैं इसलिए कुछ बच्चों में जी मिचलाना, उल्टी या पेट दर्द जैसे सामान्य छुट-पुट लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि जो बच्चे बीमार हैं या कोई अन्य दवा ले रहे हैं उनको ये दवाई नहीं खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि शरीर में कृमि संक्रमण से शरीर और दिमाग का संपूर्ण विकास नहीं होता है। कुपोषण और खून की कमी होने से हमेशा थकावट रहती है। भूख ना लगना, बेचैनी, पेट में दर्द, उल्टी-दस्त व वजन में कमी आने जैसी समस्याएं हो जाती हैं। बच्चों में सीखने की क्षमता में कमी और भविष्य में कार्यक्षमता में कमी आ सकती है। सीएमओ ने बताया कि कृमि संक्रमण से बचाव के लिये खुली जगह में शौच नहीं करना चाहिए। खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिए और फलों और सब्जियों को खाने से पहले पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। नाखून साफ व छोटे रहें, साफ पानी पीएं, खाना ढक कर रखें और नंगे पांव बाहर ना खेलें, हमेशा जूते पहनकर रखें।

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