मुंबई। महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव हुए थे और तीन दिन बाद ही 24 अक्टूबर को नतीजे आ गए। जनता ने शिवसेना और भाजपा के गठबंधन पर मोहर लगाई थी। हालांकि कुछ बातों पर सहमति नहीं बनने से सरकार नहीं बन पाई। करीब एक महीने तक सभी दलों द्वारा खूब राजनीतिक चालें चली गईं।
इसी का नतीजा था कि 23 नवंबर की सुबह राजभवन में भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि तीन दिन के भीतर ही दोनों ने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्य में राकांपा-कांग्रेस-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनी और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने।
फडणवीस ने अब जाकर अजित के साथ शपथ लेने को लेकर चुप्पी तोड़ी है। फडणवीस ने एक न्यूज चैनल के साथ बातचीत में कहा कि अजित ने उन्हें एनसीपी के सभी 54 विधायकों के समर्थन का भरोसा दिया था। अजित मेरे पास सरकार बनाने का प्रस्ताव लेकर आए थे।
अजित ने कुछ विधायकों से मेरी बात कराई थी, जिन्होंने कहा था कि वे भाजपा के साथ आना चाहते हैं। इसके अलावा उन्होंने खुद कहा था कि उनकी शरद पवार से भी इस संबंध में बात हुई है। अजित ने कहा कि एनसीपी, कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहती। तीन पार्टियों की सरकार को नहीं चलाया जा सकता। हम स्थिर सरकार के लिए भाजपा के साथ आने को तैयार हैं। मेरा मानना है कि पूरे घटनाक्रम और पर्दे के पीछे की कहानी अगले कुछ दिनों में सामने आएगी।
नतीजों की घोषणा के बाद एक महीने तक, जब तक अजित हमसे मिलने नहीं आए थे, हमने कभी विधायकों को तोडऩे या किसी दल को बांटने की कोशिश नहीं की। फडणवीस ने पीएम नरेंद्र मोदी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बीच हुई बातचीत के बारे में कहा कि इसकी मुझे जानकारी है। दोनों के बीच जो बातचीत हुई, उसका आधा हिस्सा पवार ने मीडिया से छिपा लिया।
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