समुन्दर में समा जायेगी 2050 तक मुंबई नगरिया, नई रिसर्च में हुआ खुलासा !

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नई दिल्ली। हाल ही में हुए एक शोध में दावा किया गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर वर्ष 2050 तक पूर्व में अनुमानित संख्या से तीन गुना अधिक आबादी को प्रभावित कर सकता है।

इसकी वजह से भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पूरी तरह खत्म हो सकती है।

शोध के अनुसार, मुंबई ही नहीं, चीन का शंघाई, मिश्र का अलेक्जेंड्रिया भी 2050 तक पानी में डूब जाएगा।

अब तक कई ऐसी रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जिसमें कहा गया है कि समंदर का बढ़ता जलस्तर कई शहरों के लिए खतरा है।

लेकिन ताजा रिसर्च रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जितना अब तक अंदाजा लगाया जा रहा था, यह खतरा उससे तीन गुना अधिक है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2050 तक दुनिया के कई तटीय शहरों का बड़ा हिस्सा समुद्र में समा जाएगा।

इन शहरों में भारत की बिजनस कैपिटल माने जाने वाले मुंबई शहर का नाम भी शुमार है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिसर्च को करने वाले लोगों ने सैटलाइट की रिपोर्ट के आधार पर इसे और सटीक ढंग से मापा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जितना अंदाजा अब तक लगाया जा रहा था, खतरा उससे करीब 3 गुना ज्यादा बड़ा है।

इसमें कहा गया है कि दुनिया के तटीय शहरों में करीब 15 करोड़ लोग उन जगहों पर रह रहे हैं, जो सदी के मध्य में समुद्र की लहरों के नीचे होगी।

इन शहरों में जहां सबसे ज्यादा खतरा है, दक्षिणी वियतनाम उनमें सबसे ऊपर है।

दक्षिणी वियतनाम की करीब एक चौथाई जनसंख्या करीब 2 करोड़ लोग साल 2050 तक इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

यहां का आर्थिक केंद्र माने जाना वाला शहर हो शी मिन्ह शहर पूरी तरह समुद्र में होगा।

यह रिसर्च न्यू जर्जी की एक साइंस ऑर्गेनाइजेशन क्लाइमेट सेंट्रल ने की है। इस रिसर्च में भविष्य में बढ़ने वाली जनसंख्या को लेकर कोई अनुमान नहीं लगाया गया है।

भारत पर भी यह खतरा कम नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले मुंबई शहर पर भी यह खतरा कम नहीं है।

अनुमान के मुताबिक 2050 तक मुंबई शहर देश के नक्शे से लगभग साफ हो जाएगा।

थाईलैंड की बात करें तो रिसर्च के मुताबिक, इस देश की 10 प्रतिशत आबादी ऐसी जगह रहती है जो 2050 तक समुद्र में होगी।

 

जबकि पहले अनुमान में बताया गया था कि इस देश की 1 प्रतिशत जनसंख्या ही प्रभावित होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे प्रभावित होने वाले देशों को इसके लिए तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए।

जिन देशों को इसमें बढ़ा खतरा बताया गया है, उनमें कई और देश शामिल हैं। इनमें ईरान, चीन और पाकिस्तान को लेकर भी खतरा जताया गया है।

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