बेजुबानों और बेसहारो के मसीहा :अखिलेश अवस्थी

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फिल्म अनाड़ी  सन्‌ 1959 में आई थी जिसके निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी थे। जिसके गाने के बोल -किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार,किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार-जीना इसी का नाम है।माना अपनी जेब से फकीर हैं,फिर भी यारों दिल के हम अमीर हैं। यह गाना काफी हद  तक उन्नाव जनपद के मशहूर समाजसेवी वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश अवस्थी जी के लिए  ऊपरयुक्त है। यह खूबसूरत  सा नगमा मशहूर गीतकार शैलेन्द्र ने लिखा था।  कहते है जिसका कोई सहारा न होता उसका ऊपर वाला सहारा होता है। वह कोई न कोई फरिश्ता भेज देता है मदद के लिए  ठीक वैसा ही फरिश्ता  अखिलेश अवस्थी जी  उन्नाव जनपदवासियों के लिये है। कलमकार की धरती के लिए महशूर उन्नाव की माटी पर अपने सेवा भाव से  लोगो  औऱ बेजुबान पशुओ की निःस्वार्थ  सेवा करने वाले अखिलेश अवस्थी जी किसी परिचय के मोहताज नही है। देश के एक बड़े राष्ट्रीय हिंदी दैनिक अखबार के जिला सवांददाता होने के साथ वह एक बड़े समाजसेवी भी है। इनके द्वारा किए गए जितने कार्यो की प्रशंसा की जाए वह बहुत कम ही होंगे।
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बेजुबानों और बेसहारो के मसीहा :अखिलेश अवस्थी
लावारिस पशु अगर घायल अवस्था में कहीं भी हनुमंत जीव धाम के कार्यकर्ताओं को दिख जाते हैं तो वो उसे अपने हनुमंत जीव धाम पर लाकर उसकी सेवा करके उसका जीवन बचाने का काम करते हैं। इतना ही नही मानव धर्म सबसे उत्कष्ट और बुद्धिमान श्रेणियों में आता है। बावजूद इसके वर्तमान समयांतराल में  मनुष्य ही मनुष्य का दुश्मन बन रहा है। आपको बताते चले कि  जनपद उन्नाव में 6 ब्लॉक और 16 तहसीलें है । पर ऐसी कोई जगह नही जहाँ अखिलेश अवस्थी जी के नेतृव में हनुमन्त जीव धाम  काम नही कर रहा हो। हनुमन्त जीव आश्रय बेजुबानों और बेसहारो की मदद के साथ -साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों  में अपनी टीम के साथ सुंदरकांड, रामचरितमानस का पाठ कर मिलने  बाद में  मिलने वाली भिक्षा को एकत्र कर निस्वार्थ भाव से   बेसहारा और बेजुबानों की मदद में पूर्ण सहयोग करते है।
अखिलेश अवस्थी जी बिना किसी सरकारी मदद के  अपने सहयोगियों के साथ आगामी कुछ वर्षों  से लगातार अपने जीवन के अमूल्य क्षणों को  दुसरो के  सेवा भाव मे लगा रहे है।चाहे वह मनुष्य हों या बेजुबान प्राणी उसको पीड़ा होने पर फौरन उसका इलाज करके उसका उचित उपचार करते है । ठीक वैसे ही जैसे एक माँ अपने बेटे का दर्द नही देख सकती ठीक उसी प्रकार   बेजुबानों और बेसहारो  के मसीहा अखिलेश अवस्थी जी किसी घायल बेजुबान , पशु ,पक्षी और मनुष्य को तड़पता हुआ नही देख सकते है। विश्वास ही नहीं होता कि कभी ऐसा जमाना था। लोग ऐसा सोचते थे। जीवन का सुख उन्हें दूसरों का दुःख मिटाने में नजर आता था। पर हकीकत यही है।
जमाना इतनी तेजी से चंद पिछले सालों में गिरा है। लेकिन उन्नाव की धरती पर एक मसीहा ऐसा भी है जो वाकई अपने कार्यो के दम पर दूसरों का दुःख मिटाने में नजर आता है। रास्ते मे भटक रहे  बूढे बुजर्ग हो  य रास्ते मे पड़े घायल अवस्था  में पड़े बेजुबान  शुभचिंतकों से मिली सूचना पर अखिलेश अवस्थी जी आनन -फानन में  अपने समस्त कार्यो को छोड़कर फौरन मदद के लिए  दौड़ पड़ते है। कई बार तो ऐसा  भी होता है अखिलेश अवस्थी जी भोजन करते वक्त सूचना मिलने पर भोजन को छोड़कर जैसे जिस अवस्था मे रहते है ठीक उसी अवस्था मे मदद करने को पहुँच जाते है। फिर उनको भोजन करने की चाहत भी खत्म हो जाती है।फिर  चाहे  उनको कितना भी समय लगे  या पैदल  हो लेकिन कभी अपने कर्तव्यों से वह घबराते नही है। जनपद के मौहारी बाग स्थित बिना किसी सरकारी सहायता के  एक एक गौशाला का  निर्माण कराया । जिसकी देखरेख वह अपने सहयोगी पत्रकार असीष पांडेय के साथ करते है।इस गौशाले में कई सैकड़ा गायों को उन्होंने  आश्रय दिया जिसका नाम हनुमन्त जीव आश्रय है।
इस गौशाला में विभिन प्रकार के जानवर जिनमे कई ऐसे भी पशु -पक्षी है जिनके किसी दुर्घटना में अंग छिन्न -भिन्न हो गए है उनका स्वयं अखिलेश अवस्थी जी ने  एक माँ की तरह दुलार करते हुए  मरहम पट्टी कर इलाज करके उनको नया जीवन प्रदान किया।इसके साथ ही   आवश्यकतानुसार जरूरत पड़ने पर वह बाहर से योग्य  पशुओं के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों को बुलाकर उनका ईलाज भी करवाते है। अगर देखा जाए तो बिना किसी सहायता के यह सब कर पाना बहुत ही असंभव बात है। लेकिन अखिलेश अवस्थी जी बिना किसी संकोच के अपने योग्यता एवं अपनी दमदार वाणी  के दम पर लोगो के यहाँ  रामचरितमानस और सुंदरकांड के पाठ करके  अपनी शानदार वाणी से सभी श्रोताओं को आत्मविभोर कर प्रफुल्लित कर देते है। उनकी शानदार वाणी को सुनकर बेजुबान  पशु- पक्षियों के साथ  इंसान भी उनका दीवाना हो जाता है।   इस दौरान मिलने वाली भिक्षा को  एकत्र कर और अपने बचाये हुए कुछ रुपयों से वह लगातार हर धर्म के लोगो और पशु पक्षियों की निःस्वार्थ रूप से सेवा करने में अपना जीवन  सर्वत्र किसी लालच  के लगाकर मानव धर्म के लिए एक मिशाल बन रहे है ।
कई लोग तो ऐसे भी मील है जो किसी नाली य किसी गंदी जगह कूड़े के ढ़ेर में पड़े मिले पर अखिलेश अवस्थी जी ने बिना किसी संकोच और निःस्वार्थ भाव से सेवा भाव रखते हुए तुरन्त उसको नाली य गंदी जगह से निकाल कर उसको नहलाने के बाद साफ कपड़े पहनाकर उसको भोजन अपने हाथों से खिलाया । कई बार तो ऐसे लोग भी जिनके शरीर मे कीड़े पड़े मील फिर भी अखिलेश अवस्थी जी ने तुरन्त कीड़े की दवा डालकर फौरन उनका उचित इलाज किया किया और कोशिश भी की उनकी जिंदगी बचाई जा सके मगर दुर्भाग्यवश कुछ लोगो की मौत भी हो गई ।अखिलेश अवस्थी जी बहुत बुरी तरह टूट गए मानो एक दुःख का बड़ा सा पहाड़ उन पर गिर पड़ा, परन्तु वह घबराएं नही अपने दिल पर कठोर पत्त्थर रखकर  कोसिस की और लोगो की जान वह बचा सके।
कई बार बेजुबानों को इतनी बुरी घायल अवस्था मे अखिलेश अवस्थी जी लाये  है जिनका बच पाना लगभग नामुनकिन था फिर भी उन्होंने उन बेजुबानों को एक नया जीवन प्रदान किया। उन्नाव जनपद में कई  बड़े नेता और समाजसेवी है। पर सब कही न कही अपने स्वार्थ और लालच के लिए है मगर अखिलेश अवस्थी जी जैसा कोई समाज सेवी न है जो चाहे मनुय हो या बेजुबान सबकी आवाज अपने दिल से और पीड़ा ह्दय से महसूस करते है। जो केवल अपने निजीस्वार्थ के लिए समाज सेवा करते वह समाजसेवी नही दलाल करते है। सच्चा समाजसेवी वह है जो दूसरों के लिए अपना जीवन  सर्वत्र दान कर दे। लोगो को अखिलेश अवस्थी जी से  सीख लेनी चाहिए । अगर सभी लोग एकजुट होकर निःस्वार्थ रूप से सेवाभाव रखे तो चाहे वह मनुष्य हो या बेजुबान प्राणी सबका दुःख दर्द मिट सकता है।

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