गुजरात चुनाव: कांग्रेस की ‘हार्दिक डील’ से क्यों घबराई है BJP?
‘मूर्खों ने एक फॉर्मूला दिया और मूर्खों ने उसे मान लिया. सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष वकीलों का कहना है कि आरक्षण नहीं दिया जा सकता. तुम सिर्फ ग्रेजुएट हो. मुझे यह नहीं पता कि तुमने परीक्षा पास की है या नहीं.’
‘हमने कई चीजें दी हैं, 500 मामले वापस लिए, गैर-आरक्षित समुदायों के लिए आयोग का गठन किया, पुलिस अत्याचार की जांच के लिए एक समिति गठित की.’
‘तुम्हारे द्वारा अपमान और हमारे कार्यालयों में तोड़फोड़ के बावजूद हम तुमसे अपील कर रहे हैं. यह मत सोचो कि हम जवाब नहीं दे सकते. इसलिए कि हम पद पर हैं, हमें मर्यादा बनाए रखनी है.’ एक के बाद एक ये बयान गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के हैं.हार्दिक को मंजूर कांग्रेस का आरक्षण फॉर्मूला
उनके ये बयान हार्दिक पटेल की प्रेस कांफ्रेंस के तुरंत बाद आए. नितिन पटेल के चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी. हार्दिक ने इस प्रेस कांफ्रेंस में ऐलान किया कि कांग्रेस ने आरक्षण का एक फॉर्मूला दिया है, जिस पर संविधान के भीतर अमल किया जा सकता है. कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए घोषणा पत्र में भी इसे जगह देने का वादा किया है.
हार्दिक की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं
बीजेपी के पास अब घबराने की कई वजहें हैं. पाटीदारों के दो सामाजिक संगठनों- खोदालधाम ट्रस्ट और उमैयाधाम ट्रस्ट- ने कहा है कि पटेलों को आरक्षण मिलना चाहिए. दोनों संगठनों ने हार्दिक पटेल के आरक्षण आंदोलन को सही ठहराया है. इन संगठनों का पाटीदारों के दोनों हिस्सों- कडुआ और लेउवा- पर खासा प्रभाव है.
बीजेपी में जा सकते हैं हार्दिक के दो खास
हार्दिक के दो खास साथी बीजेपी में जा चुके हैं, जबकि हाल ही में कथित रूप से हार्दिक की तीन सेक्स सीडी सार्वजनिक हुई है. लेकिन हार्दिक के समर्थकों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है. वास्तव में इन वीडियो के बाद उनकी रैलियों में भीड़ और बढ़ गई है.
इन मु्द्दों से खुद को जुड़ा महसूस करते हैं हार्दिक
हार्दिक अपनी रैलियों में जो मुद्दे उठाते हैं, लोग तुरंत उनसे खुद को जुड़ा महसूस करते हैं, खासकर गुजरात के ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों के पाटीदार उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं. उदाहरण के लिए, मंगलवार रात अहमदाबाद के पास एक गांव की रैली में हार्दिक ने कई मुद्दों पर गुजरात सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा का बढ़ता खर्च, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और ग्रामीण इलाकों में खस्ताहाल बुनियादी ढांचा जनविरोधी सरकार के उदाहरण हैं, जो निजीकरण में लगी है.
हार्दिक ने कहा ‘वो पूछते हैं कि आरक्षण क्यों चाहिए? नौकरियां नहीं हैं. पढ़ाई पूरी होने के बाद आपके बच्चे क्या करेंगे. उन्हें फोर्ड और नैनो में भेजकर देखिए? वहां बाहरी लोगों को नौकरी मिल जाएगी, लेकिन हमें नहीं.’
कांग्रेस की रणनीति
इस तेजतर्रार नेता की दो यूएसपी है- उनकी उम्र उन्हें चुनाव लड़ने से रोकती है और उन्होंने कांग्रेस में शामिल नहीं होना सुनिश्चित किया. लेकिन हार्दिक के लगातार आंदोलन ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में युवाओं की पूरी पीढ़ी को सोचने पर मजबूर कर दिया है, खासकर उनकी कोर टीम के सदस्यों को जो राजनीतिक करियर बनाना चाहते हैं.
इससे यह भी साफ होता है कि कांग्रेस को चार सीटों पर अपने उम्मीदवार इसलिए बदलने पड़े क्योंकि वह हार्दिक पटेल की पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) को अपने साथ रखना चाहती है. कांग्रेस ने सोमवार को 13 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की. इसमें बदले गए चार उम्मीदवारों के नाम भी हैं. कांग्रेस ने जूनागढ़, भरूच, कामरेज और वराछा रोड जैसी अहम विधान सभी सीटों पर उम्मीदवार बदले.
ये सीट है फसाद की जड़
हालांकि, फसाद की जड़ सौराष्ट्र इलाके की बोटाड सीट रही. कांग्रेस ने यहां पहले एनसीपी से आए मनहर पटेल को टिकट देने का फैसला किया था, लेकिन पीएएएस के विरोध के कारण उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई. आखिरकार पीएएएस के दिलीप सबवा को यहां से टिकट दिया गया.
इसे लेकर गतिरोध बना हुआ था. सोमवार को हार्दिक पटेल पीएएएस का कांग्रेस को समर्थन का एलान करने वाले थे. एक दिन पहले आरक्षण को लेकर दोनों पक्षों में सहमति बन गई थी, लेकिन गतिरोध के चलते ये मामला बुधवार तक टल गया. हार्दिक के आंदोलन का असर इससे समझा जा सकता है कि दोनों प्रमुख पार्टियों ने चुनाव में पटेलों को बड़ी तादाद में उम्मीदवार बनाया है.
अब तक 134 उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है बीजेपी
बीजेपी ने अब तक 134 उम्मीदवारों का ऐलान किया है. इनमें 34 पाटीदार हैं. कांग्रेस ने बुधवार तक 89 उम्मीदवारों का ऐलान किया था. पार्टी ने अब तक 24 पाटीदारों को टिकट दिया है. गुजरात की आबादी में पटेल 14 फीसदी हैं. कम से कम 71 विधान सभा सीटों में पेटलों के 15 फीसदी से अधिक वोट हैं.
(फर्स्टपोस्ट के लिए दर्शन देसाई)
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