आसाराम को बचाने के लिए झोकि थी पूरी ताकत और अब खुद बन गए ‘आसाराम’

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चिन्मयानंद मामले की तरह देश के बहुचर्चित आसाराम रेप प्रकरण में भी शाहजहांपुर की एक बेटी ने आवाज उठाई थी। जिसकी वजह से आज आसाराम सलाखों के पीछे सजा काट रहे हैं। आरोप है कि उस वक्त स्वामी चिन्मयानंद ने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर आसाराम को बचाने की कोशिश की थी जो बेकार गई। छात्रा से यौन शोषण के आरोप में चिन्मयानंद जेल में हैं।

आसाराम को बचाने के लिए पीड़िता की फर्जी टीसी बनाई

गौरतलब है कि जब आसाराम रेप प्रकरण सामने आया था तो आरोप लगा था कि पीड़ित छात्रा के केस को कमजोर करने के लिए चिन्मयानंद ने अपने स्कूल से फर्जी मार्कशीट और टीसी बनाकर दी थी, जिससे आसाराम पर लगा पॉक्सो ऐक्ट हट सके। चिन्मयानंद ने अपने स्कूल की प्रिंसिपल को भी जोधपुर आसाराम के पक्ष में गवाही देने के लिए भेजा था। पीड़िता परिजनों का कहना है कि स्वामी चिन्मयानंद के निर्देशन में चलने वाली एसएसएमवी से रेप पीड़िता को बालिग साबित करने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट दिए गए थे।

प्रिंसिपल ने दो बार दी थी गवाही
फरवरी 2014 में जोधपुर पुलिस ने ये सर्टिफिकेट हासिल कर कोर्ट को सौंपे थे। मामले में तत्कालीन प्रिंसिपल जया कामत ने दो बार गवाही भी दी थी। हालांकि, पिता ने जो स्कूली डॉक्युमेंट कोर्ट में रखे उसके हिसाब से पीड़िता को नाबालिग माना गया। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रिंसिपल की गवाही को अविश्वसनीय करार दिया था। जोधपुर कोर्ट ने पीड़िता को नाबालिग मानकर पॉक्सो की धारा को बरकरार रखा और आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

गौरतलब है कि आसाराम का मामला साल 2013 में तब सामने आया था जब शाहजहांपुर की एक नाबालिग लड़की ने उन पर जोधपुर आश्रम में रेप करने का आरोप लगाया था। छात्रा आसाराम के मध्य प्रदेश स्थित गुरुकुल में पढ़ती थी। इलाज के नाम पर उसे जोधपुर के निकट आसाराम के आश्रम ले जाया गया था, जहां आसाराम ने 15 अगस्त, 2013 की रात उसका यौन शोषण किया था।

छात्रा के खिलाफ भी FIR
बता दें कि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के बीच विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बीजेपी नेता पर रेप का आरोप लगाने वाली छात्रा और उसके तीन मित्रों पर रंगदारी के प्रकरण में मामला दर्ज किया है।

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