देश- कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जारी भारत जोड़ो यात्रा 30 जनवरी को समाप्त हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत जोड़ो यात्रा के समापन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 21 विपक्षी दलों को निमंत्रण दिया लेकिन इस समापन समारोह में महज 11 दल के लोग शामिल हुए। विपक्षियों का कहना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा आपने लक्ष्य को साधने में असफल रही है।
बीजेपी का दावा है कि यह यात्रा वविपक्ष को एकजुट करने के उद्देश्य से शुरू हुई थी। लेकिन अंतिम समय मे विपक्ष ने राहुल का साथ नहीं दिया और यात्रा का मक़सद अधूरा रह गया। लेकिन इन सभी दावों के बीच राहुल गांधी ने कहा है कि, विपक्ष आज साथ नहीं दिखा।
लेकिन सिर्फ इस बात से यह आंक लेना कि विपक्ष एकजुट नहीं है यह गलत है। क्योंकि कोई भी साथ कब आता है जब उनके बीच संवाद होता है। विपक्ष एकजुट है और वह एकसाथ आएंगे।
राहुल गांधी ने बार बार इस यात्रा के माध्यम से लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि बीजेपी और आरएसएस नफरती विचारधारा के लोग हैं। यह भारत को बांटने का काम करते हैं। यह लोग देश को नफ़रत की आग में झोंक रहे हैं और हमारी यात्रा नफरत के बीच मोहब्बत की दुकान खोलने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।
लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि समय के साथ राहुल गांधी ने स्वयं को एक मजबूत नेता के रूप में विकसित किया। उनके भाषणों में अब गम्भीरता दिखाई देती है। राजनीति के मुद्दे की अब वह समझ रखते हैं। लेकिन यह सब होने के बाद भी उनकी छवि चुनाव में कांग्रेस को फायदा नहीं दिला सकती। क्योंकि जिस विपक्ष को वह एकजुट करने की कवायद में लगे हैं वह विपक्ष कुर्सी की अभिलाषा रखता है। वहीं कुर्सी की अभिलाषा व्यक्ति को एकजुट नहीं होने देती।
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