नई दिल्ली. अखबार, टीवी में लंबे-चौड़े सरकारी इश्तिहार तो आए दिन आते ही रहते हैं. इस कड़ी में सूचना प्रसारण मंत्रालय लोगों पर इन सरकारी विज्ञापनों के प्रभाव को मापने की योजना बना रहा है. सूत्रों ने कहा कि इस कवायद का उद्देश्य प्रचार कार्य के लिये खर्च होने वाली रकम के न्यायोचित इस्तेमाल के लिये रणनीति बनाना है. यह पहल 2019 के अहम लोकसभा चुनावों से पहले सामने आई है.
आम चुनावों के लिये सरकार के लोगों तक पहुंचने और बीते चार साल में किये गए अपने कामों को लोगों तक पहुंचाने के लिये सरकार के इस दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है. केंद्र सरकार की तरफ से विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सरकारी सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थानों के प्रचार के लिये विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) नोडल एजेंसी है. ये विज्ञापन प्रिंट और विजुअल मीडिया में विभिन्न मंचों पर लिये जाते हैं.
सूत्रों के अनुसार इस अध्ययन से इस बात को समझने में मदद मिलेगी कि बेहतर प्रभाव के लिये किस सरकारी योजना का इस्तेमाल किस माध्यम में किया जाए? पिछले साल डीएवीपी को क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय (डीएफपी) और गीत एवं नाटक प्रभाग के साथ मिलाकर एक नई संस्था ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन बनाया गया था जिससे सरकार के प्रचार के काम को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिये बेहतर तालमेल हो सके.
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