मेरठ, यूपी के कई जिलों में आज डाक्टरों की हड़ताल चल रही है। ऐसे में इलाज के लिए केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चालू की गईं है। चिकित्सक सरकार के फैसले का विरोध करते हुए अपनी मांगों को रखा है। चिकित्सकों का कहना है कि सरकार जबतक उनकी इन मांगों की ओर ध्यान नहीं देगी हड़ताल जारी रहेगी। कहा कि सरकार के इस फैसले से मेडिकल शिक्षा खिचड़ी हो गई है।
मेरठ समेत शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर व बागपत जैसे जिलों में आईएमए के आह्वान पर चिकित्सकों ने शुक्रवार को निजी क्लीनिक व अस्पताल इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सारी सेवाएं बंद रखीं। दोपहर 1:00 बजे आईएमए मेरठ चैप्टर के पदाधिकारियों ने बैठक भी किया। अभी इनकी बैठक जारी है।
इस फैसले का हो रहा विरोध
आयुर्वेद के चिकित्सकों को सर्जरी के अधिकार दिए जाने के विरोध में आईएमए देशव्यापी असहयोग कर अपना विरोध दर्ज करा रहा है। हालांकि महामारी को देखते हुए कोरोना का इलाज करने वाले चिकित्सक व इमरजेंसी सेवाएं चिकित्सक देते रहे। आईएमए मेरठ चैप्टर के वित्त सचिव डॉ अमित उपाध्याय ने बताया कि करीब छोटे बड़े 600 अस्पताल व क्लीनिक ने असहयोग आंदोलन के तहत अपनी सेवाएं नहीं दी। आंदोलन में गंभीर मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए इमरजेंसी सेवाएं दी जा रहीं हैं। बैठक में आंदोलन अन्य बिंदु पर चर्चा की जाएगी। शाम छह बजे तक सेवाएं नहीं दी जाएगी।
डाक्टर घर से ही इसका विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि अगर हड़ताल और विरोध के लिए सड़कों पर आए तो कोरोना वायरस के बढ़ने का खतरा हो सकता है। इस कारण कोरोना के प्रकोप को ध्यान में रखते हुए घर से ही सरकार के फैसले का विरोध किया जाएगा। हालाकि कई जगहों पर इनकी बैठक की गई।
ये सेवाएं रहेगीं जारी
चिकित्सकों की हड़ताल के दौरान आज मेरठ और आसपास के शहरों के क्लीनिकों में जरुरी सेवाएं ही जारी है। केवल इमरजेंसी सेवाओं व कोरोना को छोड़कर अन्य कोई भी सेवा जारी नहीं की जाएगी।
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