डेस्क। श्रीलंका सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता पाने के लिए खुद को कम आय वाला देश घोषित कर दिया है श्रीलंका सरकार ने यह कदम अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मिली सलाह के बाद लिया है। आपको बता दें कि श्रीलंका को उम्मीद है कि इस फैसले के बाद विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष खुलकर उनकी सहायता के लिए आगे बढ़ेंगे।
आर्थिक दुर्दशा से उबरने के लिए श्रीलंका कैबिनेट प्रवक्ता ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें उसने देश को कम आय वाला राष्ट्र घोषित कर दिया। वहीं श्रीलंका सरकार ने यह कदम अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मिल रही वित्त सहायता में और अधिक आर्थिक रियायत पाने के लिए भी इस्तेमाल किया है।
श्रीलंका सरकार का यह भी कहना है कि बीते 1 साल में देश की अर्थव्यवस्था को काफी गहरी चोट पहुंची है और जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद सुकड़ कर सालाना 8.4 प्रतिशत की दर पर जा गिरा है, जो उस तिमाही की सबसे बड़ी गिरावट भी है।
विश्व बैंक की माने तो साल 2021 में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 3,815 डॉलर वाले देशों को निम्न-मध्य अर्थव्यवस्था श्रेणी में रखे जाने का नियम है। वहीं श्रीलंका कैबिनेट द्वारा पास किये गये प्रस्ताव पर प्रवक्ता बंडुला गुणवर्धने ने कहा कि कैबिनेट ने विश्व बैंक की सूची में श्रीलंका को “कम आय” में डाउनग्रेड करने का फैसला लिया है।
इसके अलावा गुणवर्धने ने कहा, “श्रीलंका जिस गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है, उसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने हमें बताया कि अगर श्रीलंका को कम आय वाले देश की श्रेणी में रखा जाएगा तो वैश्विक आर्थिक मदद मिलने की आसानी भी रहेगी।”
आपको यह भी मालूम हो कि भारत का पड़ोसी मुल्क श्रीलंका साल 1948 में स्वतंत्र हुआ था। उसके बाद से आज यह श्रीलंका की सबसे खराब स्थिति बताई जा रही है। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण श्रीलंका का पर्यटन उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो गया वहीं विदेशों मुद्रा की कमी, तेल की बढ़ती कीमतों, लोकलुभावन सरकारी वादों और पिछले साल कृषि को तबाह करने वाले रासायनिक उर्वरकों के आयात पर प्रतिबंध के नियम के कारण श्रीलंका की स्थिति बिगड़ती ही चली गई। आज हालात यह है कि लोगों को दूध और राशन के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।अस्पतालों में मरीजों का सही से इलाज नहीं मिल रहा, जो मरीज इलाज के लिए भर्ती हैं, उन्हें दवाइयां भी नहीं मिल पा रही है।
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