लखनऊ। उन्नाव दुष्कर्म पीडि़ता की मौत के तीन दिन बाद मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। रायबरेली के पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगईं ने कहा कि सोमवार को रायबरेली की अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें शिवम और शुभम को अपराध का दोषी ठहराया गया। उन्होंने कहा, केस फास्ट ट्रैक होगा और मुकदमा सिर्फ रायबरेली में ही चलाया जाएगा।
पुलिस का दावा है कि आरोप पत्र इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य द्वारा समर्थित है, जिसमें मोबाइल फोन का स्थान और मौजूदगी शामिल है, जिसमें कई लोगों द्वारा गवाही दी गई है। पीडि़ता ने दावा किया था कि दिसंबर 2018 में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और मार्च में रायबरेली के लालगंज पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पांच दिसंबर को पीडि़ता कोर्ट में सुनवाई के लिए रायबरेली जा रही थी, तभी उसके गांव में आरोपियों ने उसे आग के हवाले कर दिया।
सोमवार को दायर आरोप पत्र में शिवम और शुभम नाम के दोनों आरोपियों पर दुष्कर्म, सबूत नष्ट करने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया गया है। हत्या से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 302 भी आरोप पत्र में शामिल थी, क्योंकि पीडि़ता ने बुरी तरह से जलने के कारण दम तोड़ दिया था। दोनों उन पांच आरोपियों में से हैं, जिन्होंने उन्नाव में दुष्कर्म पीडि़ता को जला दिया था। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
एक साल पहले शिवम लडक़ी को शादी के बहाने रायबरेली ले गया था और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोप पत्र में कहा गया कि शिवम ने वहां किराए पर एक मकान लिया और मकान मालिक से पीडि़ता का परिचय अपनी पत्नी के रूप में कराया। इसने आगे कहा कि शिवम पर लडक़ी से शादी करने का दबाव डालने के बाद पीडि़त परिवार को धमकियां दी गईं।
जब शिवम और उसके परिवार ने इंकार कर दिया, तो शिकायतकर्ता ने उन्नाव छोड़ दिया और शर्मिंदगी से बचने के लिए लालगंज में अपनी रिश्तेदार के साथ रहने लगी। जांच के दौरान, सिंह ने कहा कि आरोपियों के कई बयान झूठे पाए गए और दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई, जिन्हें अदालत में पेश किया गया।
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