पडरौना,कुशीनगर : आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शीतल प्रसाद ने यही सोचा होगा कि गणतंत्र मिलने के बाद मरने पर उनके परिवार के लोगो में खुशहाली आएगी। लेकिन आजादी के इतने वर्ष बीतने बाद भी सेनानी के परिवार का बेटा के पास खुशहाली आना तो दूर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलीं। एसे मे इस सेनानी परिवार का एक मात्र 65 वर्षिय बेटा ओम प्रकाश आज भी पडरौना शहर के सरकारी रेलवे की जमीन मे फुटपात पर चाय बेचकर जीवन काट रहा है l हालाकी आजादी के दीवाने के इस परिवार को एक अदद मिलने वाली घर भी अब बांसफोरो ने कब्जा कर लिया है। पडरौना शहर के साहबगंज उत्तरी मुहल्ले के निवासी स्वं शीतल प्रसाद स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार लड़ाई को अंजाम देते रहे।
1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले शीतल ने अपने सहयोगीयो के साथ शामिल होकर रेल लाईन व कई सड़क पुल को ध्वस्त कर अंग्रेजों का संपर्क बाधित कर दिया था। जबकी इसी पडरौना के गुदरी बाजार से अग्रेजो ने सन् 32 मे स्वतंत्रा सग्रांम सेनीनी शीतल प्रसाद को गिरफ्तार कर जेल भेजा था ! आज आजादी व गणतंत्र मिलने के बाद सरकारी सिस्टम की उपेछा सिकार उनका बेटा हो रह गया है। आजादी व गंणत्रत मिलने के बाद सेनानी का परिवार बदहाल है। सेनानी का 65 वर्षिय बेटा ओमप्रकाश ने कहा कि अगर बुनियादी सुविधाओं से वंचित किसी को देखना है तो मै उसका जीता जगता नमूना हू। आजादी के पूर्वअंग्रेजों के निशाने पर मेरे पिता थे तो आज आजादी व गणतंत्र मिलने के बाद बर्तमान की सरकारे व प्रशासन की उपेक्षा के सिकार अब हम है ।
जो आज भी सरकारी रेलवे की जमीन के फुटपात पर चाय बेचकर अपना जीवन काट रहा हू आज तक हम को जरूरी सुविधाएं मिली ही नहीं हैं। सेनानी के बेटे ओम प्रकाश कहते हैं कि अभी 2 हफ्ते पहले रेलवे प्रशासन द्वारा मेरे झोपड़ी को बुलडोजर से उजाड़ दिया था | हालांकि ओमप्रकाश कहते हैं कि हमने इस मामले में डीएम को पत्र भी दिया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है जबकि वहीं दूसरी ओर रेलवे प्रशासन मोटी रकम लेकर एक व्यापारी को यहां बसाने के नियत से मुझे पुन: फिर उजाड़ने लिए के लिए इसी जनवरी 30 तारीख को चेतावनी दिया है |
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