लखनऊ : जैन मंदिर में अनोखा संग्रह, 800 साल पुराना हस्तलिखित ग्रंथ व 1000 साल पुरानी प्रतिमा है खास

[object Promise]

लखनऊ, जैन समाज मंदिर भी अहिंसा का पाठ पढ़ाने का काम करते हैं। मंदिरों में कला के उत्कृष्ट नमूने के साथ ही आशियाना के जैन मंदिर में एक हजार साल पुरानी भगवान महावीर की प्रतिमा लोगों को अपनी ओर खींचती है। मैनपुरी मंदिर से आए इन प्रतिमाओं को दिगंबर जैन मुनियों के साननिध्य में स्थापित किया गया। मंदिर में संगमरर के बने भगवान महावीर की साढ़े पांच फीट ऊंची प्रतिमा सभी 24 तीर्थंकरों की याद दिलाते हैं। 800 साल पुराने हाथ से लिखे जैन ग्रंथ समाज को एक नई विचार धारा से जोड़ता है।

[object Promise]
मंदिर के अंदर शीशे की नक्कासी आम लोगों को अपनी ओर खींचता है। मंदिर के बाहरी हिस्से में गेट और चहारदीवारी पत्थरों की डिजाइन जैन श्रद्धालुओं के साथ ही अन्य समुदाय के लोगों काे भी अपनी ओर खींचती है।

वर्तमान समय में चल रहे जैन समाज के क्षमावाणी पर्व पर मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं में मंदिर के प्रति आस्था और बढ़े इसके लिए मंदिर की कला शैली में समायानुसार बदलाव होता रहता है। मंदिर के अंदर शीशे की नक्कासी आम लोगों को अपनी ओर खींचता है। मंदिर के बाहरी हिस्से में गेट और चहारदीवारी पत्थरों की डिजाइन जैन श्रद्धालुओं के साथ ही अन्य समुदाय के लोगों काे भी अपनी ओर खींचती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जैन धर्म के ज्ञान का खजाना भी मंदिर परिसर में मिलता है।

मंदिर का गुंबद की कला शैली भी पुरानी है। मंदिर परिसर में लोगों के इलाज के लिए होम्योपैथी दवाखाना भी है। उप्र जैन विद्या शोध संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो.अभय कुमार जैन ने बताया कि मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं एक हजार से लेकर 100 साल पुरानी तक है। हाथ से लिखे ग्रंथों को संवारा गया है। 500 से 800 साल पुराने इन ग्रंथों की समय-समय पर पूजा होती है, लेकिन सुरक्षा के चलते इन्हें दिखाश नहीं जाता है। मंदिर के अंदर शांति, अहिंसा और सत्कर्म का पाठ पढ़ाने के साथ दिगंबर जैन मुनियों की त्याग की गाथा भी युवाओं को बताई जाती है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *