कुशीनगर में प्रशासनिक अधिकारियों के नाक के नीचे योगी सरकार में धर्म परिवर्तन का आरोप

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रिपोर्ट उपेन्द्र कुशवाहा

– बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बच्चो के धर्मान्तरण को प्रशासन ने नकारा,कार्यवाई पर उठे सवाल

– कुशीनगर के एक मोनास्ट्री द्वारा बच्चों के धर्मान्तरण कराने के आरोप के बाद जाँच में जुटी गई थी पुलिस

– पूरी रात कार्यवाई के नाम पर एक शिक्षक को थाने में बैठाई रही पुलिस, आनन-फानन में देर रात छोड़ा

कुशीनगर । कुशीनगर के एक मोनास्ट्री द्वारा कराए जा रहे धर्मान्तरण का मामला बीते शुक्रवार को उस समय सामने आया जब भाजपा नेता संतोष सिंह व हिन्दू युवा वाहिनी के अमरचंद हिंदुस्तानी के द्वारा रामाभार स्तूप के पास लगभग 100 से ज्यादा बच्चों का बाल मुण्डन करा दीक्षा दी जाने का विरोध से हुआ। बच्चों के साथ खड़े शिक्षक से पूछताछ करनी चाही तो भड़के शिक्षक ने बवाल खड़ा कर दिया। सूचना के बाद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुँचे।

बच्चों और उपस्थित भन्ते से बात करने के बाद एक अधिकारी ने ऐसी किसी भी प्रकार की गतिविधि से प्रथम दृश्या साफ इनकार किया। कहा कि मोनास्ट्री व इस आयोजन में शामिल अन्य सहयोगी संस्थाओं द्वारा कुछ कार्यक्रमों के आयोजन की अनुमति नहीं ली गयी थी। जिन पर नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया है। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि जब प्रशासनिक अधिकारी ने साफ कर दिया कि धर्मान्तरण नही है तो पूरी रात कार्यवाई के नाम पर नोटिस व एक शिक्षक को थाने में क्यो बैठाया गया। आनन फानन में देर रात बाल मुण्डन कराये गये बच्चो को बसों में भरकर क्यो भेजा गया। मोनेस्ट्री द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में संरक्षक की भूमिका निभाने वाले कुशीनगर एसपी को क्या यह नही पता था कि कार्यक्रम की अनुमति प्रशासन से नही ली गई है। सबसे बड़ा सवाल यह कि यदि धर्मान्तरण व बच्चो को दीक्षा नही दी गई तो मुण्डन क्यो कराया गया? क्या तथागत बुद्ध के उपदेशों को सुनने के लिए बाल मुण्डन करना बौद्ध धर्म मे अनिवार्य है ? वही कसया एसएचओ अतुल्य कुमार पाण्डेय ने कहा कि ऐसी मामला प्रकाश में आया है। इसकी सत्यता की जांच हो रही है। यदि इस संदर्भ में कोई तहरीर मिलती है, जाँच कर कार्यवाही भी की जाएगी। यह सारे सवाल लोगो को प्रशासनिक कार्यवाईयो पर उँगली उठाने के लिए मजबूर कर रहे है।

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सवालों के घेरे में मोनास्ट्री

कुशीनगर । पवित्र धातु शोभायात्रा के दौरान मोनास्ट्री द्वारा सामाजिक ,सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते है । जिसमें देश विदेश के हजारों लोग भाग लेते है । प्रशासन द्वारा इसका संरक्षण भी होता है । परन्तु यह प्रश्न खड़ा होता है कि क्या मोनास्ट्री द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आयोजित धर्म परिवर्तन कार्यक्रम का इजाजत लिया गया ? क्या इनमें शामिल बालकों के अभिभावकों से अनापत्ति फॉर्म भरवाया गया? इनके अभिभावक या जिस विद्यालय प्रबंधन से यह बच्चे आते है उनका कोई भी स्टॉफ इनके साथ श्रामरेण दीक्षा के दौरान मौजूद क्यों नहीं होता ? मोनेस्ट्री द्वारा बालकों को जो अभी स्वयं के बारे नहीं जानते ,अच्छे बुरे के फर्क कर पाने में असमर्थ है उनका धर्म परिवर्तन कराना क्या सही है ? ऐसे तमाम प्रश्न मोनास्ट्री के सामने जवाब देने के लिए खड़े हो गए । यदि यह कार्य मोनास्ट्री द्वारा प्रशासन से अनुमती के बाद कराई जाती है तो इसका अनुमति प्रमाण पत्र सार्वजनिक होनी चाहिए ।

शोभा यात्रा में हमेशा से शामिल होते रहे है प्रशासनिकअधिकारी

कुशीनगर । धातु शोभायात्रा में प्रतिवर्ष पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते रहे है। विविध कार्यक्रम इन अधिकारियों के देख रेख में आयोजित होते रहे है। पूर्व के वर्ष में कुशीनगर जिलाधिकारी रहे आंद्रा वामसी अपनी पत्नी के साथ तो कुशीनगर पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद भी शामिल हुये। इस वर्ष भी तीन दिवसी धातु शोभा यात्रा कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक कुशीनगर राजीव नारायण मिश्र को संरक्षक बनाया गया है।

क्या इन विद्यालयों द्वारा शैक्षणिक भ्रमण संबंधित ली गयी थी अनुमति

कुशीनगर । कुशीनगर व देवरिया के 6 विद्यालयों के 120 बच्चें तीन दिवसीय धातु शोभा कार्यक्रम आयोजन में लगभग 1 सप्ताह से भाग लेने आये हुए थे। क्या इन विद्यालयों द्वारा सक्षम अधिकारियों से इस संदर्भ में अनुमति ली गयी थी। यह महत्वपूर्ण प्रश्न है क्योंकि यदि इन बच्चों के साथ कोई दुर्घटना हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। बिना अनुमति यदि विद्यालयों द्वारा बच्चों को यहाँ लाया गया तो इन बच्चों के साथ घोर लापरवाही बरती गई है।

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