दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया
क्या आप जानते हैं कि दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है जो डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपये की ड्रग्स की तस्करी कर रहा था? यह सिंडिकेट इतना चालाक था कि पुलिस को पकड़ने में महीनों लग गए। इस खबर में, हम आपको इस गिरोह के बारे में पूरी जानकारी देंगे। आइये विस्तार से जानते हैं।
गिरोह का काम करने का तरीका
यह अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके देश में बड़े पैमाने पर ड्रग्स की तस्करी कर रहा था। गिरोह के सदस्य छोटे-छोटे पैकेट्स में ड्रग्स की तस्करी करते थे, जिससे उन्हें पकड़ा जाना मुश्किल हो जाता था। उन्होंने फर्जी सिम कार्ड, प्राइवेसी टूल्स और फर्जी आईडी का भी इस्तेमाल किया ताकि पुलिस से बच सकें।
गिरोह का मास्टरमाइंड
इस गिरोह का मास्टरमाइंड लोकेश ढींगरा उर्फ लोकी है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लोकेश एक आदतन अपराधी है और कई अन्य अपराधों में भी शामिल रहा है। पुलिस ने उसके पास से 1.5 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति भी जब्त की है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने पिछले तीन महीनों में इस गिरोह की कई जगहों पर छापेमारी की है। पुलिस ने 48 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त किया है, जिसकी कीमत 20-25 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों विवेक और मनशेर सिंह को भी गिरफ्तार किया है। विवेक को थाईलैंड से गिरफ्तार किया गया था।
गिरोह का नेटवर्क
इस ड्रग्स सिंडिकेट का नेटवर्क बहुत बड़ा है और यह गुरुग्राम और नोएडा में सक्रिय था। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर ड्रग्स की तस्करी कर रहा था।
गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस ने मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके और उनको गिरफ्तार किया जा सके। यह कार्रवाई भारत में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ एक बड़ी जीत है।
गिरफ्तार लोगों पर आरोप
गिरफ्तार किए गए सभी लोगों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन पर ड्रग्स की तस्करी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और धन शोधन जैसे गंभीर आरोप हैं।
डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और फर्जी दस्तावेज़ों का उपयोग
ड्रग्स तस्करी के गिरोहों ने हाल के वर्षों में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए तकनीक का उपयोग करना शुरू कर दिया है। डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करके, वे अपनी पहचान छुपाते हैं और आसानी से ड्रग्स की तस्करी करते हैं। फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके, वे पुलिस से बचने में कामयाब होते हैं।
तकनीक का इस्तेमाल कैसे होता है?
डार्क वेब एक गुप्त इंटरनेट नेटवर्क है जहाँ ड्रग्स खरीदने और बेचने के लिए एन्क्रिप्टेड संचार का उपयोग किया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करके, वे भुगतान का पता लगाने से बचते हैं। फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके वे अपने आप को पुलिस के जांच से बचाते हैं।
निष्कर्ष
यह ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ दिल्ली पुलिस की एक बड़ी कामयाबी है। इसने दिखाया कि ड्रग्स तस्करी का काम कितना संगठित और तकनीक पर आधारित हो गया है। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से न केवल ड्रग्स तस्करी का मुकाबला किया जाएगा बल्कि लोगों को भी जागरूक करने में मदद मिलेगी।
टेक अवे पॉइंट्स
- दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।
- गिरोह डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर रहा था।
- पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड लोकेश ढींगरा को गिरफ्तार किया।
- गिरोह ने पिछले तीन महीनों में करोड़ों रुपये की ड्रग्स की तस्करी की थी।
- पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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