लेफ्ट के गढ़ त्रिपुरा की सत्ता पर BJP की नजर, बनाई ये योजना

लेफ्ट के गढ़ त्रिपुरा की सत्ता पर BJP की नजर, बनाई ये योजना

 

 

पूर्वोत्तर में पैठ बनाने की कवायद के तहत बीजेपी अब वामदल शासित राज्य त्रिपुरा में जोर लगा रही है और राज्य में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम) को टक्कर देने का दायित्व बीजेपी पन्ना प्रमुखों को सौंपा गया है.

पार्टी ने 60 मतदाताओं पर एक कार्यकर्ता को नियुक्त किया है जो सीधे मतदाताओं के सम्पर्क में रहेंगे. बीजेपी के त्रिपुरा प्रदेश प्रभारी सुनील देवधर ने कहा कि पार्टी काफी समय से राज्य में जमीन तैयार करने में जुटी है. इसी का नतीजा है कि करीब 2 साल में डेढ़ लाख लोग दूसरे दलों से बीजेपी में आए हैं. पार्टी का पूरा जोर बूथ प्रबंधन पर है.

उन्होंने कहा, ‘हम फर्जी वोटरों की शिनाख्त कर उसे बाहर करवाने, नए वोटरों को जोड़ने और बांग्लादेश से आए फर्जी वोटरों को बाहर करने के साथ ही प्रदेश सरकार के घोटाले और स्थानीय समस्याओं को मुद्दा बना रहे हैं.’

देवधर के मुताबिक, जो मुद्दे राज्य की जनता को प्रभावित करते हैं, उनमें सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि नहीं होने के अलावा 1993 से सरकारी अध्यापकों की भर्ती न होने और मनरेगा है, जिसमें घोटाला ही घोटाला है. वहीं बहुचर्चित चिटफंड मामला भी एक प्रमुख मुद्दा है, जिसमें काफी संख्या में जनता प्रभावित है.2018 के चुनावों में पन्ना प्रमुख की भूमिका

बीजेपी ने त्रिपुरा में मतदाता सूची के हर पन्ने के 60 मतदाताओं पर एक कार्यकर्ता नियुक्त किया है. फरवरी 2018 में आसन्न राज्य के विधानसभा चुनाव में इन पन्ना प्रमुखों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

बीजेपी नेता ने कहा कि त्रिपुरा में 25 साल के वामपंथी शासन में राज्य में जनजातियों का सर्वाधिक शोषण हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि अत्यंत गरीब लोगों तक प्रदेश की कम्युनिस्ट सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की जन कल्याण की योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचने दिया.

देवधर ने कहा कि आज विपक्ष में रहकर हम उनकी केवल आवाज उठा सकते हैं जबकि सत्ता में आने पर जब केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होगी तब प्रदेश के विकास की रफ्तार तेज होगी.

सीपीआई को हार साफ दिखाई दे रही है’

उन्होंने कहा कि त्रिपुरा के 12 लाख युवाओं को अगर रोजगार देना है तो माणिक सरकार को बेरोजगार करना होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में बीजेपी की परिवर्तन सभा में शामिल होने वाली जनता की गाड़ियों को सीपीआई के लोगों द्वारा आने से रोका गया. इस बात से यह साफ प्रतीत होता है की सीपीआई बौखला गई है और उनको अपनी हार साफ दिखाई दे रही है.

उन्होंने कहा कि सीपीआई को अब यह समझ लेना चाहिए की वो लोगों को सभा में आने से तो रोक सकती है लेकिन जनता के बुलंद हौसले को कैसे रोक पाएगी? देवधर ने कहा कि सीपीआई (एम) ने त्रिपुरा में पिछले 35 वर्षो के शासनकाल में आदिवासी लोगों के लिये कुछ भी नहीं किया. आदिवासी महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है . मुख्यमंत्री माणिक सरकार के पास गृह विभाग भी है लेकिन कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है.

बहरहाल, वामदलों के नेतृत्व वाले त्रिपुरा में प्रचार अभियान तेज करने के लिए भाजपा का एक संसदीय दल राज्य का दौरा करने वाला है. यह दल राज्य के वर्तमान हालात का जायजा लेगा. त्रिपुरा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

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