कबीर, सूरदास, प्रेमचंद को पढ़ेंगे चीनी

कबीर, सूरदास, प्रेमचंद को पढ़ेंगे चीनी

 

 

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर/ पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।। पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय/ ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय…।। संत कबीर के ऐसे ही हृदय परिवर्तन करने वाले दोहों को अब चीन सरकार चीनी भाषा में छपवाकर अपने नागरिकों तक पहुंचाना चाहती है.

दोनों देशों में सीमा विवाद को लेकर होने वाले तनाव के बीच किताबों के जरिए एक दूसरे को समझने की कोशिश होगी. कबीर ग्रंथावली चीनी भाषा में ट्रांसलेट होगी. यही नहीं चीन के लोग सूरदास का सूर सागर, मुंशी प्रेमचंद का रचना संचयन, भारतेंदु हरिश्चंद्र का नाटक संचयन, वृंदावनलाल वर्मा की मृगनयनी, जयशंकर प्रसाद का रचना संचयन और महादेवी वर्मा का रचना संचयन पढ़ेंगे.

भारत-पाक बंटवारे की कहानी जानेंगे चीनी

यशपाल का झूठा सच और भीष्म साहनी की तमस से चीन के लोग भारत-पाक बंटवारे की त्रासदी के बारे में जानकारी लेंगे. श्रीलाल शुक्ल की राग दरबारी, कमलेश्वर की कितने पाकिस्तान एवं सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन अज्ञेय की शेखर एक जीवनी भी अपनी भाषा में पढ़ेंगे.

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चीनी साहित्‍य.

इसके अलावा फणीश्वर नाथ रेणु, मोहन राकेश, निर्मल वर्मा, मन्नू भंडारी, काशीनाथ सिंह, पीसी बागची, आरके नारायण, गुलजार, राजा राव, सुनील गंगोपाध्याय, यूआर अनंतमूर्ति एवं तकाजी शिवशंकर पिल्लै की रचनाएं भी चीन की सरकार ट्रांसलेट करवा रही है.

चीन की 25 किताबों का हिंदी में होगा अनुवाद
हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे को मजबूत करने के लिए दोनों देशों की सरकारें अपने-अपने यहां के बड़े लेखकों के विचार एक दूसरे को पढ़वाना चाहती हैं. इसके तहत भारत सरकार चीन लेखकों की किताबों का हिंदी में अनुवाद करवाएगी. भारत में यह काम नेशनल बुक ट्रस्ट कर रहा है. नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन बल्देव भाई शर्मा ने इस प्रोजेक्ट पर कहा “भारत-चीन का प्राचीन सांस्कृतिक संबंध है. भारतीय संस्कृति के प्रति चीन का हमेशा रुझान रहा है. इसीलिए चीनी यात्री फाह्यान, ह्वेनसांग यहां आए थे. अब इस नई पहल से दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को और अच्छे तरीके से समझ पाएंगे.”

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नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन बल्देव भाई शर्मा

चीन की वो किताबें, जिन्हें आपको पढ़वाना चाहती है सरकार
दोनों देशों में ट्रासंलेट होने वाली किताबों का चयन स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिट्रेचर एंड कल्चरल स्टडीज, जेएनयू में चाइनीज भाषा के प्रोफेसर बीआर दीपक ने किया है. न्यूज18 डॉटकॉम ने प्रोफेसर दीपक से पूछा कि इन चीन की जिन किताबों को भारत सरकार यहां के नागरिकों को पढ़वाना चाहती है उनमें है क्या?

जवाब में प्रोफेसर दीपक ने कहा “चीन की चीन की संस्कृति और मानसिकता को जानने के लिए वहां के लेखकों को पढ़ना बहुत जरूरी है.  इस प्रोजेक्ट में ऐसी ही किताबों का चयन किया गया है, जिनसे हम चीन को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे. उससे लाभ ले पाएंगे. आज के दिन चीन के बारे में जो जानकारी भारतीय लोगों को है वह पश्चिमी देशों से ली गई है.”

प्रोफेसर दीपक के अनुसार “कन्फ्यूशियस के सूक्ति संग्रह और मेनशियस की बुक से चीन की प्राचीन सभ्यता और सोच जानेंगे. सभ्यता एक निरंतरता है वह टूटती नहीं. इसलिए इस पर लिखी गई किताबों से हम यह समझ पाएंगे कि चीन भविष्य में क्या करना चाहता है. कन्फ्यूशियस कहता है कि जो आपको पसंद नहीं है उसको दूसरे पर थोपना नहीं चाहिए. जबकि मेनशियस सद्भाव की बात करता है.”

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जेएनयू में चीनी भाषा के प्रो. बीआर दीपक

हिंदी में आएगी चीन के राजवंशों की कहानी
भारत-चीन संबंधों पर काम करने वाले जेएनयू के प्रोफेसर ने कहा “रोमांस ऑफ द थ्री किंगडम में वहां के तीन राजवंशों की कहानी है. इसी तरह से मोमेंट इन बीजिंग भी पढ़ेंगे. पेइचिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ची शेलिंग की भारत के बारे में लिखी गई एक पुस्तक का भी अनुवाद होगा. इसके अलावा वांगशू की लुक्स ब्यूटीफुल, यू हुया की टू लाइव, ल्यू झेन्यून की वन सेंटेंस वर्थ टेंन थाउजैंड, माओ डुन की मिडनाइट एवं ड्रीम ऑफ द रेड चैंबर नामक किताबें इस सूची में हैं, जिनसे हम चीन के प्राचीन इतिहास से आधुनिक समाज तक को जानेंगे.”

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