ममता सरकार के इस कदम को राज्यपाल ने बताया असंवैधानिक, विजयवर्गीय ने भी साधा निशाना

[object Promise]

कोलकाता। लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में कई दफा भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थीं। इसमें कुछ लोगों की जान भी गई थी। हालांकि हालात में अभी भी ज्यादा सुधार नहीं है। मोदी सरकार और बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में ठनी हुई है। ताजा विवाद ममता सरकार द्वारा राज्यपाल जगदीप धनखड़ की अधिकारियों के साथ मुलाकात टालने पर खड़ा हुआ है।

नॉर्थ और साउथ 24 परगना के अधिकारियों के साथ अपनी मुलाकात टाले जाने को राज्यपाल असंवैधानिक बताया है। राज्यपाल ने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य में सेंसरशिप लागू है। मेरी जिले के अधिकारियों के साथ मुलाकात पर 17 अक्टूबर को अधिसूचना जारी हुई थी।

जिला अधिकारी ने जवाब दिया कि प्रदेश सरकार की अनुमति के बाद इस बारे में कार्यवाही की जाएगी। यह असंवैधानिक है। मैं राज्य सरकार के अधीन नहीं हूं। उल्लेखनीय है कि अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के प्रशासनिक दौरे का हवाला देकर राज्यपाल से मिलने से इंकार कर दिया है।

भाजपा महासचिव एवं पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भी ममता पर निशाना साधा। विजयवर्गीय ने कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं। वह प्रधानमंत्री नहीं हैं। एनआरसी लागू करना है कि नहीं इस पर फैसला केंद्र को करना है। वे इतनी परेशान क्यों हैं? यदि सरकार एनआरसी लागू करने का फैसला लेती है तो वे कुछ नहीं कर पाएंगी क्योंकि यह केंद्र का फैसला होगा। पश्चिम बंगाल की सरकार संविधान के हिसाब से नहीं चल रही। राज्यपाल को यदि अनुमति लेनी पड़े तो इसका मतलब है कि ममताजी का कानून जो पश्चिम बंगाल में चलता है वह देश का कानून नहीं है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *