मस्जिदों में छुपकर रह रहे भारी संख्या में विदेशी मौलवियों के मिलने के बाद ‘Tableegi Jamaat’ शक के घेरे में

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रांची। रांची में एक सप्ताह के भीतर 29 विदेशी मौलवी का मिलना कोई बड़ी साजिश तो नहीं। जिले के विदेशी शाखा को उनके आने व रहने की सूचना नहीं होने के कारण वे संदिग्ध नजर आने लगे हैं। राज्य, यूं कहें तो पूरे देश में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉक डाउन नहीं किया गया होता तो इसका पता भी नहीं चलता। जमात के नाम पर कोई बड़ा खेल तो नहीं हो रहा है। देश के पटना, मेरठ की मस्जिदों के अलावा रांची के तमाड़ व हिंदपीढ़ी की मस्जिदों में चुपके-चुपके रह रहे भारी संख्या में विदेशी मौलवियों के मिलने के बाद से ही केंद्रीय जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

एनआइए, इंटेलिजेंस ब्यूरो सहित अन्य खुफिया एजेंसियां इनके मंसूबों का पता लगा रही है। गोपनीय तरीके से अनुसंधान जारी है। विदेशियों को संरक्षण देने वालों की भी जांच एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं। रांची जिले के विदशी शाखा में सबसे ज्यादा आवेदन व सूचनाएं मिशनरीज संस्थाओं के पड़े हैं। यहां विदेश से आने वाले हर एक नागरिक चाहे वह किसी देश का हो, उसकी सूचना पड़ी मिल जाएगी। जब उनकी सूचना रांची पुलिस की विदेशी शाखा में पड़ी मिल सकती है तो फिर विदेशी नागरिक की सूचना क्यों नहीं। झारखंड पुलिस मुख्यालय भी इस संबंध में कुछ भी बोलने से बच रहा है।

रांची जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मानें तो सिर्फ तीन देशों के नागरिक को ही अपने मूवमेंट संबंधित सूचना संबंधित जिले की विदेशी शाखा को देना है। इनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान शामिल हैं। अन्य देशों के नागरिक के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। फिर भी गोपनीय सूचना है कि केंद्र की खुफिया एजेंसी वस्तुस्थिति का जायजा ले रही है।

भाजपा ने रांची के हिंदपीढ़ी में पकड़े गए 24 विदेशियों को आधार बना राज्य सरकार को घेरा है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अनंत ओझा ने कहा कि यह मस्जिद में विदेशियों के पाए जाने की पहली घटना नहीं है। इसके पूर्व भी रदगांव स्थित मस्जिद में चीन, किर्गिस्तान जैसे देशों से आए विदेशी पकड़े गए थे। अनंत ओझा ने कहा कि कोरोना संकट के बीच राज्य में गंभीर साजिश रचे जाने की आशंका गहरा गई है। राज्य की जनता एक तरफ कोरोना संकट से जूझ रही है वहीं, दूसरी ओर विदेशी अराजक शक्तियां राज्य को अशांत करने की साजिश रचने में लगीं हैं। कहा, पहली गिरफ्तारी के बाद ही सरकार और प्रशासन को जांच में तेजी लानी चाहिए थी। इस बात की पड़ताल करनी चाहिए थी कि कहीं किसी और मस्जिद में विदेशी छिपे तो नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि ऐसे विदेशी तत्व किसके बुलावे पर आए हैैं और किस उद्देश्य से मस्जिदों में छिपे है। जो लोग इस लॉक डाउन की स्थिति में भी प्रशासन को इनके छिपे होने की सूचना नहीं दे रहे हैैं। उनसे भी पूछताछ होनी चाहिए। केवल संदिग्धों को पकड़कर क्वारंटाइन में डालने से इस गंभीर समस्या का समाधान नही होने वाला। इसकी व्यापक और गंभीर जांच सरकार सुनिश्चित करे।

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