सांपो की इस प्रजाति का नाम है रसल वाईपर। आमतौर पर सांप अंडे देते है जबकि यह रसल वाइपर अंडे नही देता, बल्कि बच्चे पैदा करता है। इसका नवजन्मा बच्चा भी उतना ही जहरीला होता है जितना वयस्क रसल वाइपर। महाराष्ट्र में इसे घोनस और उत्तर भारत के पूर्व में इसे लुहारिन भी कहते हैं।रसल वाइपर अगर आपको अंग्रेजी का “S” आकार बनाकर सिमटता हुआ कुकर की सीटी जैसा बजाना शुरू कर दे तो समझ लीजिए कि अब वह आपको काटने की फिराक में हैं।ये पूरी ताकत से एंटीवेनम आपके अंदर डाल देता है। चूंकि इसके दांत अपेक्षाकृत अधिक बड़े होते हैं इसलिए इसके काटे स्थान पर दर्द भी ज्यादा होता है। खतरनाक ऐसा कि इसके काटने के बाद कितनी मात्रा में एंटीवेनम असर करेगा यह पता कर पाना मुश्किल होता है।
भारत मे अधिकतर मौतें इसके काटने से ही होती हैं। अगर सही समय पर एंटीवेनम मिल जाये तो कुछ दवाइयों के साथ इंसान की जान बचाई का सकती है।इसमें हीमिटोक्सिक नामक जहर पाया जाता है। इसके काटने पर गैंगरीन हो जाता है, फफोले ओढ़ने लगते है, सूजन आ जाती है और धीरे धीरे नर्वस सिस्टम बैठ जाता है।अगर सही समय पर यानी तीन से चार घण्टे के अंदर अस्पताल पँहुच गए तो ठीक अन्यथा गम्भीर घटना घट सकती है। कुछ चार से छह प्रतिशत सांप ही जहरीले होते हैं जिनमे यह डेडली स्नेक है। देखने मे मतिभ्रम हो जाता है क्योंकि अजगर जैसा दिखता है जबकि इसके शरीर पर चॉकलेटी कलर के गोल निशान होते है जबकि अजगर में चॉकलेटी पट्टियां होती हैं। इसका मुंह त्रिभुजाकार होता है। यही इसकी खास पहचान है।
जैसा कि मैंने ऊपर बताया कि भारत मे अधिकांश मौते इसके काटने से होती है और किसानों से सबसे ज्यादा पाला भी इसी से पड़ता है। इसकारण यह जानकारी मेरी वाल पर लिखना आवश्यक था।सांप पर्यावरण और किसान मित्र होता है। मिट्टी के रंग में मिल जाने के कारण इसका पता नही चल पाता। पैर पड़ जाए तो आत्मरक्षा में काट लेता है। इनका जीवन बचाया जाना आवश्यक है।
(ये लेख निखिलेश मिश्रा जी द्वारा लिखा गया है जो कुशल लेखक और जानकार है)
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